105 किलोमीटर की दूरी 6 दिनों में तय कर पाया स्पीड पोस्ट,प्रतिदिन 17.5 किलोमीटर चला स्पीड पोस्ट,जब की पैदल दूरी 21 घंटे मैं ही तय की जा सकती है।
योगेश राजपूत, होशंगाबाद
एमपी मीडिया पाइंट कहने को तो पोस्टल डिपार्टमेंट 72 घंटे में "स्पीड पोस्ट" डाक देश के किसी भी कोने में पहुंचाने का दावा करता है अन्यथा देरी होने पर नुकसान की भरपाई की बात भी कही जाती है, लेकिन धरातल पर स्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत हैं।पोस्टल डिपार्टमेंट के अधिकारियों के निकम्मेपन के चलते लोग इस कोरोनाकाल में भी अपने डाक के लिए परेशान हो रहे हैं।खासबात यह कि डूबते जहाज पर सवारी कर रहा डाक विभाग अब भी तेवरी दिखाने से बाज नहीं आ रहा है। समस्याओं के संदर्भ मे पूछे जाने पर पोस्ट ऑफिस में आने वाले लोगों से बदतमीजी की जा रही हैl
विगत 16 सितंबर को बैतूल जिला मुख्यालय से रवाना स्पीड पोस्ट डाक 21 सितंबर को होशंगाबाद पहुंची इस बीच विभाग की वेबसाइट के ट्रैकर पर बकायदा डाक होशंगाबाद पहुंचना दिखाया जा रहा था, इस मामले में जब पोस्ट ऑफिस पहुंचकर जानकारी लेना चाही तो डाक नहीं होना बताया गया जब पोस्ट मास्टर से मुलाकात की तो वे भड़क पढ़े और बदतमीजी पर उतारू हो गए। मामला मीडिया तक पहुंचा तब कहीं जाकर 21 सितंबर को डाक गंतव्य तक पहुंची। सड़क मार्ग से होशंगाबाद और बैतूल की दूरी 105 किलोमीटर आंकी जाती है चार पहिया वाहन से इस दूरी को तय करने में 2 घंटे 29 मिनट का समय लगता है वही पैदल दूरी तय करने में कुल 21 घंटे 31 मिनट का समय लगता है और पोस्टल डिपार्टमेंट की स्पीड पोस्ट प्रतिदिन मात्र 17.5 किलोमीटर की दूरी तय कर 6 दिनों के लंबे अंतराल में होशंगाबाद पहुंच पाती है इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पोस्टल डिपार्टमेंट के अधिकारी कर्मचारी कितने कर्तव्य परायण होंगे वही साधारण डाक को पहुंचने में कितना समय लग जाता होगा मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई हैl



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