बाढ़ उतरने के बाद शुरू हुआ सर्वे - सामने आया 128 करोड़ से अधिक का नु कसान
98 बाढ़ प्रभावित गांव के 5325 परिवार हुए प्रभावित
बीमारी न फैले इसके लिए गांव - गांव चल रहा अभियान
नसरुल्लागंज, एमपी मीडिया पाइंट

नर्मदा तट के गांव के अतिरिक्त क्षेत्र में बहने वाली अन्य सहायक नदियों के उफान पर आने के बाद बाढ़ ने जो तबाही मचाई और ग्रामों में जो मंजर देखने को मिला। वह क्षेत्र की अभी तक की सबसे बड़ी तबाही के रूप में सामने आया। नर्मदा सहित अन्य सहायक नदियों मैं आई बाढ़ का पानी उतरने एवं हालात सामान्य होने पर प्रशासन के द्वारा प्रारंभिक सर्वे प्रारंभ किया गया। सर्वे में तहसील क्षेत्र के 98 गांव बाढ़ से प्रभावित आए और प्रारंभिक आकलन में 128 करोड़ से भी अधिक का नुकसान सामने आया। प्रशासनिक स्तर पर लगातार ग्रामों में पहुंचकर डोर टू डोर सर्वे किया जा रहा है और आने वाले 1 सप्ताह में पूरी स्थिति साफ होगी। लेकिन ग्रामों में हुए नुकसान का आंकड़ा चौंकाने वाला है और इसके पूर्व में कभी भी इतना अधिक नुकसान देखने को नहीं मिला। इस संबंध में एसडीएम डीएस तोमर ने बताया कि राजस्व,पंचायत, कृषि, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों का अमला ग्रामीण क्षेत्र में लगा हुआ है और प्रभावित परिवारों को लगातार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त विशेष रुप से सभी ग्रामों में साफ सफाई का अभियान युद्ध स्तर पर प्रारंभ हो चुका हैं। 
                       ज्ञातव्य है कि बीते 29 एवं 30 अगस्त को लगातार हुई बरसात के बाद बरगी, वारणा, कोलार, तवा डैम के गेट खोले जाने से क्षेत्र में बहने वाली नर्मदा ,सीप, अजनाल ,अंबर ,भब्बड़ नदी उफान पर आ गई और देखते ही देखते क्षेत्र के कई गांव जलमग्न हो गए। लगातार चार दिनों तक पूरे क्षेत्र में बाढ़ ने तबाही मचाई और करोड़ों रुपए का नुकसान क्षेत्रवासियों को उठाना पड़ा।

98 गांव के 5325 परिवार हुए प्रभावित

एसडीएम ने इस संबंध में बताया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित ग्रामों में तत्काल सर्वे का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है और प्रारंभिक सर्वे में क्षेत्र के कुल 98 गांव के 5325 परिवार प्रभावित होकर सामने आए हैं। इस बाढ़ की विभीषिका में कई परिवारों के आशियाने पूरी तरह उजड़ गए और उनके पास अपने जीवन यापन करने के लिए भी सामग्री नहीं बची हैं। 

128 करोड़ से भी अधिक का नुकसान

बाढ़ के कारण क्षेत्र में 128 करोड रुपए से भी अधिक का नुकसान सामने देखने को मिला हैं। जिसमें 98 गांव के 5325 परिवारों को इस आपदा का सामना करना पड़ा है और बाढ़ के कारण लगभग 287 पशु 43 लाख कीमत के बह गए। इसके अतिरिक्त 26815 हेक्टेयर की 91 करोड़ रुपए कीमत की फसल भी इसमें प्रभावित हुई। बाढ़ के कारण 2200 पक्के मकान क्षतिग्रस्त हुए और 3125 कच्चे मकान बह गए। जिन का अनुमानित नुकसान लगभग 30 करोड़ है। विद्युत विभाग को भी लगभग 7 करोड रुपए का नुकसान बाढ़ के कारण हुआ है जिसमें कई ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे एवं तार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं

बीमारी से बचाने प्रारंभ हुई साफ सफाई एवं बांटी दवाइयां

बाढ़ के बाद फैलने वाली महामारी से बचाने के लिए प्रशासन के द्वारा प्रभावित ग्रामों में साफ सफाई का अभियान प्रारंभ कराया गया और स्वास्थ्य अमले को भेजकर दवाइयों का वितरण भी किया गया। इसके अतिरिक्त ग्राम के जल स्त्रोतों में दवाइयां भी डाली गई। जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल सके। बाढ़ की विभीषिका के दौरान प्रशासन के द्वारा प्रतिदिन 20000 पैकेट पहुंचाए बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाएं गए। 

105 गांव में शुरू हुई विद्युत सप्लाई

 विद्युत वितरण कंपनी के कार्यपालन यंत्री अभय गोप ने बताया कि बाढ़ के चलते तहसील के 107 गांव की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई थी। विभाग द्वारा मैदानी स्तर पर कर्मचारियों को तैनात कर 105 गांव की विद्युत सप्लाई शुरू कर दी गई है। वही 2 गांव ऐसे हैं जहां विद्युत पोल बाढ़ में बह जाने के चलते विद्युत सप्लाई अभी तक शुरू नहीं की गई है । यहां भी विद्युत सप्लाई का काम शीघ्र शुरू कर दिया जाएगा।
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