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| दिनेश शर्मा |
अपराधी हैं कि मानते नहीं , और पुलिस है कि जानती नहीं ----------🖋️
दिनेश शर्मा
(पूरे फोटो मे ऊपर-नीचे काले दृश्य के पीछे कुछ शब्द हैं जिसे सिर्फ़ समझना जरुरी है।) जगाने के लिए आज दोनों के फोटो एकसाथ...(कुछ बोलते हैं)
पूरे अनुविभाग सहित नगरीय क्षेत्र में जिस तरह एक के बाद एक लूट-पाट, चोरी , चेन स्नेचिंग, की वारदाते घटित हो रही है और पुलिस अपराधियो को पकड़ने के बजाय केवल ओर केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर रही है.. ।इससे ऐसा लगता है कि पुलिस कोरोना काल मे अपना मूल हुनर भूल सी गई है ,
लगातार हो रहे अपराधों से पुलिस को भले ही फर्क न पड़ रहा हो , पर आम जनमानस के लिए यह बहुत ही चिंता का विषय हो गया है । ओर यही वजह है कि , अब जनता का पुलिस के प्रति विश्ववास कम दिखाई दे रहा है ।
पूरी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री के ग्रह जिले में आखिर कब तक देश भक्ति और जन सेवा जैसे आदर्श वाले सिद्धान्तों पर चले वाली पुलिस जनता को आश्वासन दे देकर सांत्वना देती रहेगी , ओर अपराधी बेखौफ होकर अपराधों की झड़ी लगाते रहेंगे ? चोर लुटेरों का आलम यह है कि शहर में एक के बाद एक दिन दहाड़े लूटपाट , चेन स्नेचिंग चोरी जैसी घटनाएं करते चले जा रहे है। ओर पुलिस बेबस , असहाय होकर कुछ नही कर पा रही है ।
आपको बता दे कि शहर में अन्य छोटी मोटी चोरियां हो या फिर रोजाना शहर से चोरी हो रहे दो पहिया वाहनों की चोरी की तो लम्बी फेहरिस्त है , जिनका पुलिस के पास कोई हल ही नही है मोटरसाइकिल चोरियों के तो अधिकांश मामले पुलिस रिकार्ड दर्ज ही नही होते है पीड़ित अपने स्तर से ही अपनी गाड़ी होने का हर्जाना भर अपराधियो से ले आते है । पर लूट पाट चोरी चेन स्नेचिंग जैसी बड़ी घटनाओं के प्रति भी पुलिस का गम्भीर न होना बड़ा चिंता का विषय है । यही वजह है कि बड़ी बड़ी लूट चोरी रिकार्ड में दर्ज होकर पुलिस की निष्क्रियता को उजागर कर रही है। एक मोबाइल लूट के अपराधी को पकड़ने के बाद पुलिस ऐसे अपनी पीठ थपथपा रही है जैसे अब पुलिस ने पूरे क्षेत्र में अमन चैन कायम कर दिया हो । जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि
जुलाई माह में दिन दहाड़े भरे बाजार से 98 हजार की लूट , इसके बाद ही अगली घटना मुख्य हाइवे पर टोल प्लाजा के अधिकृत कम्पनी के कर्मचारी से महज डंडे के जोर पर ही लुटेरे दिन दहाड़े लगभग 10 लाख रुपयो से भरा बैग लूट कर ले गए , ओर पूरे जिले की पुलिस ने खूब भागम भाग मचाई जो पूरे जिले ने देखी, ओर सुनी , ओर अंत मे आज तक भी इन बड़ी लूट की घटनाओं में लिप्त लुटरे पुलिस के लिए चुनोती बने हुए , है । पुलिस भले ही इन घटनाओं को भूल गयी हो पर जनता के मानस पटल पर आज भी इन बड़ी घटनाओं को लेकर डर समाया हुआ है । लोग पूरी तरह से अपने ही शहर में अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे है ।
पुलिस की उदासीनता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शहर में दिन हो या रात आवासीय कालोनी , घरों के ताले टूट कर चोरियां होती जा रही है , पर पुलिस कुछ भी नही कर पा रही है, फिर तो आम जनता का डर वाजिब दिखाई पड़ता है ।
जहाँ तक शहर में जुए सट्टे की बात करे तो बेखोफ़ खेला ओर खिलाया जा रहा है , शहर के चौक चौराहों पर या वो चिन्हित जगह जहाँ जुआ सट्टा का खेल होता है पुलिस को मंडराते देखा जा सकता है।
लूट चोरी, चेन स्नेचिंग जैसी शहर में हो रही घटनाओं के लिए बहुत हद तक शहर में खुलेआम चल रहे जुए ओर सट्टे का खेल भी हो सकता है । कयोंकि जब शहर से बाहर के लोग अगर तहसील में हुआ खेलने आये तो भी आसानी से समझा जा सकता है कि यहाँ की पुलिस व्यवस्था कैसी होगी ।
पिछले दिनों आष्टा के सिद्दीकगंज थाना क्षेत्र में मुख्य कन्नौद मार्ग पर सिंगरचोरी से पुलिस ने पूरी ताकत लगा कर भारी लोगो की जुए की फड़ पर घेरा बन्दी कर छापा मारा था और जुआ पकड़ा था ,
मजेदार पहलू यह रहा कि पुलिस के मुताबिक जो जुआरी पकड़ाए थे वह अन्य तहसील के होकर मात्र जुआ खेलने आये थे , उस दिन गांव में खड़ी चार पहिया गाड़िया भी इस बात की गवाही दे रही थी कि जुआरी बाहर गांव से आये है , पर इन जुआरियों के पास से मात्र 2480/- (दो हजार चार सौ )रुपयो की जप्ती होना बहुत ही हास्यस्पद होकर पुलिस की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लगा रही है ।
वैसे भी जब लंबे समय तक पुलिस विभाग में अधिकारी एक स्थान पर रहते है तो अधिकारी भले ही अपराधियो की कार्यकुशलता को न समझ पा रहे हो पर अपराधी जरूर अधिकारियों की सजगता ओर कार्यकुशलता को समझ गए है , यही वजह है कि अपराधों की सूची रोजाना बढ़ती जा रही है और पुलिस आश्वासनों से काम चला रही है और बेचारी जनता बेबस हो टकटकी लगाए देख रही है ,
खेर यह सब तो पिछले घटना क्रम है जिन्हें पुलिस भी अब याद रखना नहीं चाहती होगी , पर क़्या किया जावे- अपराधी है कि मानने को तैयार ही नही है , वह भी पुलिस की कमजोर कड़ी को भाँप गए है , ओर अपराध दर्ज अपराध किये जा रहे है ,
अब तो आलम यह है कि शहर के व्यस्तम मार्गो चौराहों पर मोबाइल लूट, चेन स्नेचिंग की वारदात आम बात हो गयी है , आष्टा शहर में अब महानगरों की तर्ज पर खुले आम आपराधिक घटनाएं हो रही है , ओर पुलिस अब भी मात्र घटना स्थल का निरीक्षण, कर लुटे पिटे लोगो को सांत्वना देकर अपनी जिम्मेदारी का इतिश्री कर रही है ।
हमारी पुलिस कैसी हो इसका वास्तविक नजारा कुछ दिन पूर्व देखने को मिला था ,जब कि ग्राम मुंडला का एक परिवार और ग्रामवासी खुल कर पार्वती पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगा रहे थे , इतना ही नही पीड़ित व्यक्ति के साथ प्रमुख जनप्रतिनिधि भी खड़े होकर न्याय की बाते कर रहे थे पर आश्चर्य है कि पीड़ित परिवार मोन हो गया , ओर पार्वती पुलिस आज भी आनन्द कर रही है ।
बस हम तो यही कहेंगे की चल रहे चोर सिपाही के खेल में चोर पुलिस को बुरी तरह से मात दे रहे है ----ओर बेबस जनता लुट पिट रही है आज रखवाल कोई नही है?



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