(साहित्य का सोपान)..
__मत करना प्रेम उस लड़की से ____
मत करना प्रेम कभी भी
उस लड़की से
जिसकी आंखों में पलते है ढ़ेर सारे सपनें
जो होती है थोड़ी अल्हड़ , मदमस्त और चंचल
बातों में जो रखती है तल्खियां ज्यादा
मिठास कम !
मत करना प्रेम तुम उस लड़की से
जो रखती है अपनी सोच
जो तुम्हारी बातें यूं ही नहीं मान लेती
करती है वाद विवाद
और फिर ढ़ेर सारे सवाल
तर्क वितर्क !
मत करना प्रेम उस लड़की से
जो नहीं करती है बातें चांद सितारों की
बल्कि जिती है यथार्थ में
जो तुम्हारे पद और पैसों से नहीं
तुम्हारी मर्दानगी से भी नहीं
बल्कि तुम्हारे भीतर छुपे नटखट बच्चे से करती है प्रेम
जो न केवल जिद्दी है बल्कि है प्यार का भूखा भी !
मत करना प्रेम उस लड़की से
जो करती है अपनी पसंद और नापसंद का इजहार
जो करती है बात बेबात तुमसे झगड़े
आधी रात को नींद न आने पर नहीं जगाती है तुम्हें
बल्कि अकेले ही टहल आती है छत पर
या फिर हेडफोन लगा सुन लेती है गाने
या फिर मोबाइल की रौशनी में ही पढ़
लेती है किताब ताकि
तुम्हारी आंखे न खुल जाये
मत करना प्रेम उस लड़की से
जो नहीं देखती है सास बहू के सिरीयलस
बल्कि देखती है
समाचार देश दुनिया की
और सरकार के कामों की करती है
कभी सराहना तो कभी कभी आलोचना
मत करना
उस लड़की से प्रेम जो
फूलों के गुलदस्तों से नहीं करती है अपने बगीचे से प्यार !
मत करना प्रेम उस लड़की से
जो लिखती है कविताएँ ,
कहानियाँ !
जो तुम्हें संजों देती है शब्दों में मोती की तरह
जो प्रेम से लेकर विछोह तक के
दर्द को समेट देती है कविताओं में
मत करना प्रेम उस लड़की से
जो रोती नहीं
जो टूटने के बाद भी नहीं लेती है तुम्हारे कंधे का सहारा
जो आंसुओं को समझती है कमजोरी
जिसे नफरत है सहानुभूति से
जिसकी ताकत होती है वो स्वंय
जिसकी ताकत होती है उसकी निश्छल मुस्कान
जो साथ तुम्हारे हो तो बन जाती है
तुम्हारी दोस्त, तो कभी माँ, तो कभी प्रेमिका
और निभाती है क्ई किरदार
नहीं बनती कभी तुम्हारी कमजोरी
बल्कि बनती है ताकत
जो कहती है तुमसे
"तुम सिर्फ उसके हो"
पर नहीं करती कोशिश कभी भी
तुम्हें छीनने की
नहीं रोकती तुम्हें किसी और का होने से
नहीं रखती है रिश्तों में कोई भी शर्ते
बस करती है तुम्हें प्रेम बेवजह बस यूँ ही
मत करना प्रेम उस लड़की से जो
कहती है तुम्हें अपनी दुनिया
और ऐसा कहने के बाद करती है तुमसे अटूट प्रेम
और अगाध विश्वास
फिर उस विश्वास पर विश्वास कर
सौंप देती है अपना सर्वस्व
मत करना प्रेम कभी भी ऐसी लड़की से
क्योकिं ऐसी लड़कीयां जब
प्रेम करती है तो डूब जाती है तुममें पुरी तरह से
मगर होते ही जरा से भी
छल का एहसास
एक झटके में कर लेती है
खुद को तुमसे दूर
बिना तुम्हें एहसास कराये , बिना ताने दिये
समेट लेती है खुद में
और हो जाती है चुप हमेशा के लिए
और कर देती है आजाद तुम्हें बिना किसी भी सवाल के
ऐसी लड़कीयां प्यार में टूटने के बाद
रोती नहीं है
न ही मांगती है कभी तुमसे प्यार की भीख
बल्कि दिल में अपने दर्द को समेटे
फिर से लौट जाती है अपनी कविताओं की दुनिया में
और दिल को बना के पत्थर
निकाल लेती है खुद को तुम्हारे भीतर से
और कर लेती है खुद को तुमसे दूर बहुत दूर!!
इसलिए मत करना प्रेम उस लड़की से
क्योकिं तुम उस लड़की से
प्रेम करने के बाद
फिर कभी भी लौट नहीं पाओगे अपनी दुनिया में
और रह जाओगे उस लड़की में ही कहीं
और खो दोगे
खुद को
हमेशा _ हमेशा के लिए !!
रूबी प्रसाद
सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
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