लेखिका
हौंसला.....
हौंसला अपना बुलंद करो ''
जब कभी हारकर या विवश होकर ,
निराशा के बादल छा जाएंगे
हार न मानने का जज़्बा तुम्हें बढ़ाएगा !
आखिरकार अडिग हौंसला तुम्हें बढ़ाएगा,
आखिरकार देखना तुम्हारे आगे ,
धरती हिल जाएंगी ,आसमां झुक जाएगा !
भय -विस्मय का अब अंत करो ,
आते हुए दुखों को पसंद करो
कर्म ज़्यादा व् बातें चंद करो
होंसला अपना इतना बुलंद करो !
दुखों का पहाड़ टूटने पर भी ,
न ताने खड़ा रह पाएगा !
दर्द का अंबार फूटने पर भी ,
सर उठाकर सतत चलता जाएगा
हौंसला अपना बुलंद करो
शोभा खरे , नई दिल्ली
------------------



Post A Comment: