मीडिया को कुचलने की कायराना हरकत..
भूपेश बघेल सरकार में पत्रकारों के साथ मारपीट,
पत्रकार कमल शुक्‍ला पर हमला, सरकार की नाकामी


विजया पाठक

एडिटर, जगत विजन

 हाल ही में छत्‍तीसगढ़ के कॉकेर में एक पत्रकार कमल शुक्‍ला की कुछ असामाजिक तत्‍वों ने यह कहकर पिटाई कर दी कि उसने भूपेश सरकार की एक सच्‍चाई को प्रकाशित किया था। यह सच्‍चाई सरकार के चमचों को इतनी नागवार गुजरी कि उन्‍होंने पत्रकार की जमकर पिटाई कर घायल कर दिया। कमल शुक्‍ला एक जाने-माने पत्रकार और समाजसेवी हैं। निष्‍पक्ष पत्रकारिता करते हैं और सरकार और समाज का आईना बनकर हकीकत को सामने लाते हैं। हमेशा से आदिवासियों और कमजोर तबके की आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि कमल शुक्‍ला पर हमला होने की यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी भूपेश सरकार में पत्रकारों पर हमले हुए हैं। पत्रकारों की आवाजों को दबाया जाता है, कुचला जाता है। मीडिया की आजादी को दबाकर तानाशाही रवैया अपनाया जाता है। काँकेर में पत्रकार के साथ हुई हिंसक वारदात इस सरकार के कार्यकाल की कोई पहली वारदात नहीं है। कांग्रेस के लोग इसी तरह हिंसा करके असहमति को कुचलने का आपराधिक कृत्य करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचा रहे हैं। जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई है, चहुँओर माफिया ग़िरोह उग आए हैं और वे बात-बेबात प्रदेश के जागरूक जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, सभ्य व अमन-पसंद क़ानून-व्यवस्था में विश्वास रखने वालों पर जानलेवा हमला करके भय, हिंसा और आतंक का राज चला रहे हैं। शासन-प्रशासन प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा के सिर्फ़ हवा-हवाई दावे करके इन माफिया ग़िरोहों को संरक्षण देकर क़ानून के राज पर लोगों के भरोसे को तोड़ने में लगे हैं। यह प्रदेश सरकार क़ानून-व्यवस्था को चुनौती देते माफियाओं की संरक्षक हो गई है।

      पत्रकार कमल शुक्‍ला पर हुए हमले से राज्‍य के पत्रकारों में दहशत और भय का माहौल है। भूपेश बघेल के पक्ष और विरोध में लिखने में कतरा रहे हैं। इस समय पत्रकारों के लिए एक अंग्रेजी शासन जैसा माहौल बना दिया है। माहौल ऐसा बना दिया है कि पत्रकार समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्‍हें करना क्‍या है।

      बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कांकेर में पत्रकारों के साथ की गई मारपीट के मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उस बयान को घोर आपत्तिजनक माना है, जिसमें मुख्यमंत्री ने यह कहकर पत्रकारों को चुप कराने की शर्मनाक कोशिश की कि ‘आज पत्रकार कम-से-कम ताल ठोककर कह तो रहे हैं कि भूपेश हम आ रहे हैं। यही प्रजातंत्र है। साय ने कहा कि आत्ममुग्ध सीएम ऐसा जताना चाह रहे मानो पत्रकारों से भेंट कर मानो अहसान कर दिया। साय ने कहा कि पुरानी घटनाओं को लेकर प्रलाप कर रहे मुख्यमंत्री बघेल हाल की काँकेर की घटना को क्या जस्टीफाई करने और छिपे तौर पर पत्रकारों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की आज़ादी का झंडा लेकर देशभर में हंगामा मचाने वाली कांग्रेस के मुख्यमंत्री का यह बयान नितांत ग़ैर ज़िम्मेदाराना है और अभिव्यक्ति को कुचलने की कांग्रेसी फ़ितरत का निंदनीय प्रदर्शन है। प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल यह कहकर इस मामले की ज़िम्मेदारी से क़तई पल्ला नहीं झाड़ सकते कि इंटक का कांग्रेस से कोई सीधा संबंध नहीं है। ऐसा कहकर क्या मुख्यमंत्री बघेल सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस को भी अलग-अलग खाँचों में देखने और बताने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सच का सामना करने से कतरा रहे हैं और इस मुद्दे पर भी प्रदेश को भरमाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

      पत्रकार पर हुए हमले की निंदा करते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने संज्ञान लिया है। निश्‍चित तौर पर मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल को इसका जवाब उपर देना होगा। वह चाहे कितनी ही कोशिश कर लें कि मीडिया की आवाज को दबाया जा सकता है लेकिन सब जानते हैं कि मीडिया की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है। एक आवाज दबती है कई आवाजें उठ खड़ी होती हैं। भूपेश जी गलतफहमी में जीना छोड़ हकीकत का सामना कीजिए।

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