लेखिका
सैनिक"
एक सैनिक
शहीद होकर
कभी भी अकेला नहीं जाता !
वो अपने संग ले जाता है..
छज्जों पर खिलखिलाती,
बाट जोहती ,
राखियों की उजड़ी उम्मीदें !
दरवाजों- झरोखों से तकती,
बुढ़ाती पीली आँखों का
...ढलता उजास !
दूधिया नुकीली नाक पे चुटकी से झरा,
छितराया सिंदूरी बसन्त !
काले धागे में गुंथे
पथराये आशीषों के...गंडे ताबीज़ !
काँसे के कजरौटे में पगा
दिवाली का काजल !
बर्नियों ,डिब्बों में संजोये
मुरब्बे,बड़ियाँ, चिप्स-पापड़,
गाजर की कांजी,पंचमेल अचार
गुलाल की थाली के संग
अनरसे,झारे ,गाँठिये- मठरी
परात भर गुझिया का कसार !
बैठकी से कान लगाये
होठों में दबा पल्लू
..तो कभी
आवाज़ की टोह लेती
खनकती चूड़ियाँ ,
हरा कचौरा,
रूनझुन करती पायजेबें !
और...
अपने जाने के एवज् में
पीछे छोड़ जाता है वो--
मौली चूड़ियों की किरचों से घायल
गेरुआ शामों में कराहता बिस्तरा ,
बिलखती रातों के आँसुओं से
..भीगा हुआ तकिया,
अस्ताचल में डूबता नाउम्मीदी का सूरज,
चबूतरे पर बेमन से गुड़गुड़ाते हुक्के,
तो ...कहीं पार्क में--
वो जबर्दस्ती थकाने वाला
एक और.. एक्स्ट्रा राउंड !
सूनी देहरी के उबासी लेते बंदनवार,
फर्श पर रुलते हुये ..अधपढ़े अख़बार ,
आमद की ख़बर पर बनाई गई
वो सारी लिस्टें !
नींम कडुये...
नीली कटेरी से चुभते रतजगे,
मन के रिसते घावों पर,
नमक भुरके दर्द की चुभन
कई जोड़ी आँखों से ...
बारहमासी झरता सावन !
अनवरत बुढ़ाता ,
लाठी टेकता बेमतलबी इंतज़ार !
एक सैनिक
शहीद होकर
कभी भी अकेला नहीं जाता ।
प्रीति राघव, गुरुग्राम, हरियाणा
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परिचय
प्रीति राघव, गुरुग्राम, हरियाणा में निवास करती हैं। स्वतंत्र लेखन के माध्यम से साहित्य सेवा करती हैं। आप कवितायें, कहानियाँ , यात्रा वृत्तांत, समसामयिक लेख, नाटक , रिपोतार्ज, संस्मरण, साक्षात्कार आदि विधाओं में लेखन करती हैं। आपके नाटकों का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्र से हो चुका है। आपके रूह की आवाज़' और 'काव्य कुमुदिनी' साझा काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपकी रचनाऐं प्रकाशित होती रहती हैं। साहित्य संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित भी किया जा चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


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