पूर्णाहुति के पश्चात भंडारे में उमड़ा आस्था और श्रद्धालुओं का सैलाब
भगवान को भक्ति से ही पाया जा सकता है, बुद्धि से नहीं-अभिराम त्यागी 




सीहोर,  एमपी मीडिया पाइंट 

यह सत्य है कि भगवान को बुद्धि के बल से जाना नहीं जा सकता, लेकिन भगवान को हृदय के भावों से पाया जा सकता है। जो सरल हृदय होते हैं, भाव युक्त होकर भगवान से अपना संबंध जोड़ते हैं, उनके लिए भगवान सुलभ हैं। मीरा, तुकाराम, कबीर आदि अनेक उदाहरण हैं, जिन्होंने भगवान को देखा है, सुना है और बातें भी की है। उक्त विचार शहर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर स्थित कान्हा स्टेट कालोनी में जारी पंचकुंडीय महायज्ञ एवं प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आयोजित श्रीराम कथा सत्संग के दौरान यहां पर उपस्थित महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री अभिरामदास त्यागी हिमायलवासी ने कहे। 
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राष्ट्रीय हित को आगे रख कर जीता है। वहीं सही मायने में देश, धर्म और कुल की रक्षा कर सकता है। मनुष्य जीवन भगवान की देन है। हमें अपने जीवन में ऐसा करना चाहिए जिससे इतिहास में नाम दर्ज हो। इस जमीन पर कई ने जन्म लिए और चले गए। इस भारत भूमि पर ऐसे वीरो ने जन्म लिया है जिन पर हमें गर्व है और उनके आदर्शों पर चलते है। इस दौरान भक्तगण उपस्थित थे। 
एकमात्र मानव जीवन ही वह अवसर है
महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री अभिरामदास त्यागी हिमायलवासी ने कहा कि एकमात्र मानव जीवन ही वह अवसर है, जिसमें हम जो भी चाहें, प्राप्त कर सकते हैं। इसका सदुपयोग हमें कल्पवृक्ष की भांति फल देता है। मनुष्य परिश्रमी है, अध्यवसायी भी है। मनुष्य में बुद्धि और चेतनता होने के कारण उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। संसार में जो कुछ दिखाई देता है, वह अधिकतर मानव की देन है। मनुष्य ने धीरे-धीरे एक लंबी यात्रा तय करते हुए कष्टों और कठिनाइयों को सहते हुए विकास की चरमावस्था को प्राप्त कर लिया है। अपनी जरूरतों के अनुसार उसने कई आविष्कार कर डाले हैं। और हमारी मौजूदा सभ्यता और संस्कृति उसी का परिणाम है। 
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में आस्था का सैलाब
इस संबंध में जानकारी देते हुए मंदिर के संस्थापक दीपक चौहान ने बताया कि  पंचकुंडीय महायज्ञ एवं अद्र्धनारेशवर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर विशेष रूप से तिरुपति बाला जी की मूर्ति का भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस भव्य मंदिर में श्री-श्री 108 त्यागी बाबा, शिव परिवार, राम दरबार और संकटहरण श्री हनुमान जी महाराज की मूर्तियों को प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूजा अर्चना आदि की गई। इस मौके पर पूर्णाहुति एवं प्रसादी वितरण का आयोजन किया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
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