राजेश बनासिया, भाऊँखेड़ी, एमपी मीडिया पाइंट
वैसे तो समूचे भारत मे प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन गरीबों को सरकार ने आवास मुहैया कराए हैं जिनके कच्चे झोपड़ीनुमा मकान थे। इस कड़ी में इछावर ब्लाक मे हजारों लोगों को आवास मिले भी उनके कच्चे मकान के स्थान पर पक्के मकान बन गए।
मगर सीहोर जिले की इछावर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव भाऊँखेड़ी में अभी भी 90 वर्षीय भँवरी बाई मकान के सपने संजोए आवास की राह देख रही हैं वर्तमान मे भंवरी बाई का मकान पूरी तरह से टूट चुका है और कभी भी उक्त मकान ढहने से एक बड़ी घटना घट सकती है इस बात से कतई इनकार नही किया जा सकता!आवास न मिलने पर भंवरी बाई ने बताया की कई बार उन्होंने पंचायत के चक्कर लगाए मगर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वह कहती हैं इस समय मेरे पास वर्षों पुराना कच्चा मकान है जोकि बहुत खराब स्थिति में है यह मकान कभी भी टूट कर गिर सकता है।
आगे भंवरी बाई कहती हैं कि ग्राम में ऐसे लोगों को भी पंचायत ने आवास बांट दिए जिनके पक्के मकान थे मगर हमे आज तक नही मिला है फिर भी बूढ़ी आंखे अब भी आस लगाये बैठी है की सरकार का कोई नुमाइंदा आये और मेरे मकान की हालत देखकर मुझ गरीब को एक आवास मिल जाये।
गौरतलब है कि इछावर ब्लाक मे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पंचायत स्तर पर लेन-देन के चलते मूंह देखकर तिलक किया गया। कई ग्रामीणों ने जन सुनवाई के माध्यम से शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।



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