विदिशा संसदीय सीट
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प्रत्याशियों की अंजान छवि के चलते मुकाबला फूल और पंजे मे

राजेश शर्मा
टिकट वितरण से पहले लोकसभा की विदिशा सीट को जितनी तवज्जो देश मे दी जा रही थी वह अब गायब है क्योंकि दोनों प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कांग्रेस से ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान मे हैं जिनकी लोकप्रियता केवल अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र तक ही सीमित है कांग्रेस के प्रत्याशी तो इछावर से विधायक भी रहे और दो बार विधानसभा के चुनाव लड़ने का उन्हें अनुभव प्राप्त है लेकिन भाजपा के प्रत्याशी रमाकांत भार्गव को तो वह भी नहीं, वह सिर्फ थोड़ी-बहुत पहचान सहकारिता के क्षेत्र मे रखते हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी शैलेन्द्र पटेल का नाम इछावर,नसरुल्लागंज,रेहटी मे और ज्यादा से ज्यादा एक चौथाई बुदनी तहसील मे पहचाना जाता है लेकिन भाजपा प्रत्याशी रमाकांत भार्गव का नाम तो समूचे बुदनी विधानसभा तक मे विस्तारित नहीं है। समझा जा सकता है कि दोनों प्रत्याशियों के अंदाजमार चाल-चलन-चेहरे को भांपकर जैसे-तेसे मतदाता इसबार पोलिंग बूथ तक जा पाएगा।
ज्यादातर मतदाता पार्टी के चुनाव चिन्ह देखकर मतदान के लिए बाध्य नजर आ रहे हैं यही कारण है कि मतदान के सिर्फ़ 12 दिन बाकी हैं लेकिन चुनाव को लेकर कहीं कोई अबतक सरगर्मी या उत्साह नज़र नहीं आ रहा। मतदान का प्रतिशत गिरने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
रायसेन की जनससभा मे विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान कह चुके कि भार्गव तो निमित्त मात्र हैं चुनाव तो हम लड़ रहे हैं क्योंकि वह अंतर्मन मे जानते हैं कि शायद हमारा प्रत्याशी 'चुनाव जिताऊ' नहीं है!
वैसे देखा जाए तो लोकप्रियता मे कांग्रेस के शैलेन्द्र पटेल भाजपा के भार्गव पर काफी भारी पड़ रहे हैं। देखने मे आ रहा कि वह जहां-जहां जा रहे वहां-वहां क्षेत्र के युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने मे सफल हो रहे हैं इसके अलावा बड़ी शालीनता के सांथ भाजपा के दिग्गजों से 30 वर्ष का हिसाब भी मांग रहे हैं जो कहीं न कहीं मतदाताओं को सोचने के लिए मजबूर कर रहा है।
अपने शासनकाल के दौरान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने क्योंकि विकास की पोटली सिर्फ़ और सिर्फ़ बुदनी मे ही खोली बाकी सातों विधानसभा को इस मामले मे नज़र अंदाज ही किया जिसका लाभ कांग्रेस के शैलेन्द्र पटेल को मिलता दिखाई दे रहा है। वह कहते हैं मेने इछावर विधानसभा मे भाजपा का रिकार्ड ध्वस्त किया अब विदिशा लोकसभा का 30 वर्ष पुराना रिकार्ड तौड़ने आया हूँ। अपनी छवि के आधार पर शैलेन्द्र पटेल विदिशा से अकेले के दम पर चुनाव लड़ रहे हैं दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी रमांकात भार्गव अपनी झोली सुषमा स्वराज व शिवराजसिंह की कमाई से भरते नजर आ रहे हैं। यदि वह अच्छा प्रदर्शन करने मे कामयाब रहे तो कहा जा सकता है कि उसका मूल कारण कमल का फूल होगा ना की खुद की छवि!
इसबार विदिशा लोकसभा चुनाव मे जातिवाद का फेक्टर भी दिखाई नहीं दे रहा बस इछावर,लाड़कुई,रेहटी क्षेत्र मे खाती जाती के मतदाता का ध्रुवीकरण शैलेन्द्र पटेल के पक्ष मे होता दिखाई दे रहा। मोदी फेक्टर काम नहीं कर पा रहा। बस एक फेक्टर है परंपरागत मतदान, जो यदि चला तो कांग्रेस के लिए दुखदायी साबित होगा।
कुल मिलाकर अभीतक की तस्वीर यही है कि विदिशा सीट पर फूल और पंजे के बीच जंग जारी है मुकाबला दिलचस्पहीन नजर आ रहा।मतदाताओं मे उत्साह भी दिखाई नहीं दे रहा, दोनों पार्टी के क्षेत्रीय कार्यकर्ता भी जोर पकड़ नहीं पा रहे। प्रचार-प्रसार के मामले शैलेन्द्र पटेल थोड़ी-बहुत बड़त जरुर बनाए हुए हैं। माहौल देखकर फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता कि मतदाताओं को लोकसभा चुनाव के मतदान दिवस का बेसब्री से इंतज़ार है।
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राजेश शर्मा, एमपी मीडिया पाइंट


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