अबतक के सभी रिकार्ड टूटे,
800 से पार हो रही ओपीडी,
ओपीडी के मामले मे इछावर ने पछाड़ा करीब 15 जिला चिकित्सालयों को,
अब भगवान ही मालिक इछावर अस्पताल का,
अस्पताल परिसर मरीज़ों और वाहनों से पटा,
स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्थाएँ चरमराई
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
कहने के लिए इछावर का शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मप्र मे कायाकल्प योजना के तहत प्रथम स्थान रखाता है लेकिन इस अस्पताल के अंदरूनी हालात बद से बदतर बने हुए हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्टाफ की कमी।चाहे वह डाक्टरों की कमी हो या पैरामेडिकल की,
बात सोमवार 16 सितंबर 2019 की कही जाए तो इछावर अस्पताल की ओपीडी के सभी रिकार्ड उस वक्त ध्वस्त हो गए जब 821 मरीज अपने दर्द को लेकर वहां पहुंचे। मरीजों की भीड़ देख स्वास्थ्यकर्मी भी एकबारकी सक्ते मे आ गए।पूरे धेर्य और विश्वास के सांथ सांथ स्वास्थ्य सेवाएं जारी रही यहा सबसे अच्छी बात रही।
ई-अस्पताल के मुताबिक आज इछावर ने प्रदेश के 15 जिला जिला चिकित्सालयों को पछाड़ा जिसमें हरदा,उमरिया,शाजापुर,नरसिंपुर,पन्ना,राजगढ़,सीधी,शाजापुर,मंडला,शिवपुर,ढिंडोरी आदि शामिल हैं।
इछावर के नागरिकों ने अस्पताल की समस्याओं से स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कई मर्तबा अवगत कराया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। लिहाज़ा हर रोज हजारों मरीज परेशान हो रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि सरकार हमारे मर्ज का आखिर क्यों नहीं कर पा रही निकाल!
पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल ने बताया कि अस्पताल की समस्या से विधानसभा मे मेरे द्वारा कई बार अवगत कराया गया लेकिन मंत्रालय द्वारा अनसुनी की गई। पूर्व राजस्व मंत्री एवं इछावर विधायक करणसिंह वर्मा का भी कहना है कि इछावर अस्पताल की समस्याओं को लेकर मेरे प्रयास भी कमतर नहीं लेकिन कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की चूक हो रही है जो निंदनीय है।
वास्तव मे तो इछावर अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलना चाहिए। यहां 50 बेड और 12 डाक्टरों सहित भरपूर स्टाफ होना चाहिए लेकिन ना जाने क्यों सरकार ध्यान नहीं दे रही। तकरीबन 150 गांव ले लोगों अपने दुख-दर्द का इलाज कराने प्रतिदिन पहुंचे हैं। कई मर्तबा तो अस्पताल के ओपीडी की संख्या 700 से पार हो जाती है जिसे सिर्फ़ दो डाक्टर और सीमित पैरामेडिकल स्टाफ संभालता है।
गत माह नर्स के सांथ मरीज एंव उसके परिजनों से बद्तमीजगी भी की गई। इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्यकर्मी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
नागरिकों का कहना है कि वर्तमान हालतों को देखते हुए शासन अविलंब इछावर अस्पताल का उन्नयन कर उसे सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाए जिससे करीब डेढ़ लाख लोगों के दर्द को चेन आ पाए।
इछावर अस्पताल मे ओपीडी के अबतक के सभी रिकार्ड टूट गए सोमवार को 821 मरीज इलाज कराने पहुंचे जिन्हें तीन डाक्टर और तीन नर्सों ने संभाला। हमने उक्त समस्या से उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया है।
800 से पार हो रही ओपीडी,
ओपीडी के मामले मे इछावर ने पछाड़ा करीब 15 जिला चिकित्सालयों को,
अब भगवान ही मालिक इछावर अस्पताल का,
अस्पताल परिसर मरीज़ों और वाहनों से पटा,
स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्थाएँ चरमराई
इछावर, एमपी मीडिया पाइंट
कहने के लिए इछावर का शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मप्र मे कायाकल्प योजना के तहत प्रथम स्थान रखाता है लेकिन इस अस्पताल के अंदरूनी हालात बद से बदतर बने हुए हैं इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्टाफ की कमी।चाहे वह डाक्टरों की कमी हो या पैरामेडिकल की,
बात सोमवार 16 सितंबर 2019 की कही जाए तो इछावर अस्पताल की ओपीडी के सभी रिकार्ड उस वक्त ध्वस्त हो गए जब 821 मरीज अपने दर्द को लेकर वहां पहुंचे। मरीजों की भीड़ देख स्वास्थ्यकर्मी भी एकबारकी सक्ते मे आ गए।पूरे धेर्य और विश्वास के सांथ सांथ स्वास्थ्य सेवाएं जारी रही यहा सबसे अच्छी बात रही।
ई-अस्पताल के मुताबिक आज इछावर ने प्रदेश के 15 जिला जिला चिकित्सालयों को पछाड़ा जिसमें हरदा,उमरिया,शाजापुर,नरसिंपुर,पन्ना,राजगढ़,सीधी,शाजापुर,मंडला,शिवपुर,ढिंडोरी आदि शामिल हैं।
इछावर के नागरिकों ने अस्पताल की समस्याओं से स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को कई मर्तबा अवगत कराया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। लिहाज़ा हर रोज हजारों मरीज परेशान हो रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि सरकार हमारे मर्ज का आखिर क्यों नहीं कर पा रही निकाल!
पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल ने बताया कि अस्पताल की समस्या से विधानसभा मे मेरे द्वारा कई बार अवगत कराया गया लेकिन मंत्रालय द्वारा अनसुनी की गई। पूर्व राजस्व मंत्री एवं इछावर विधायक करणसिंह वर्मा का भी कहना है कि इछावर अस्पताल की समस्याओं को लेकर मेरे प्रयास भी कमतर नहीं लेकिन कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की चूक हो रही है जो निंदनीय है।
वास्तव मे तो इछावर अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलना चाहिए। यहां 50 बेड और 12 डाक्टरों सहित भरपूर स्टाफ होना चाहिए लेकिन ना जाने क्यों सरकार ध्यान नहीं दे रही। तकरीबन 150 गांव ले लोगों अपने दुख-दर्द का इलाज कराने प्रतिदिन पहुंचे हैं। कई मर्तबा तो अस्पताल के ओपीडी की संख्या 700 से पार हो जाती है जिसे सिर्फ़ दो डाक्टर और सीमित पैरामेडिकल स्टाफ संभालता है।
गत माह नर्स के सांथ मरीज एंव उसके परिजनों से बद्तमीजगी भी की गई। इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्यकर्मी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
नागरिकों का कहना है कि वर्तमान हालतों को देखते हुए शासन अविलंब इछावर अस्पताल का उन्नयन कर उसे सिविल अस्पताल का दर्जा दिलाए जिससे करीब डेढ़ लाख लोगों के दर्द को चेन आ पाए।




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