भागते नज़र आए भय के भूत,प्राचीन कालियादेव मेला संपन्न  . . .

   देखिये मेले के वीडियो 

कालियादेव से हुकुमसिंह मेवाड़ा एमपी मीडिया पाइंट

जिला सीहोर के तहसील मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर एंव इछावर के सघन जंगल मे पितृमोक्ष अमावस्या की रात लगने वाले प्राचीन कालियादेव मेले का शनिवार  दोपहर तीन बजे समापन हो गया। करीब 10 हजार श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। यह सबसे अच्छी बात रही कि मेला बिना किसी विघ्न-बाधा के सम्पन्न हो गय‍ा। अलबत्ता तंत्र-मंत्र के सहारे लोगों की उपरी बाधाएं अवश्य दूर किए जाने के नजारे जरुर दिखाई दिए।


 आस्था और अंधविश्वास से ओतप्रोत इस मेले मे करीब 35 हजार लोगों के पहुंचे की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन लगाकर भारी बारिश के चलते कम संख्या मे ही लोग शिरकत कर पाए।

 रात एक बजे मेला पूरे शबाब पर था। मेले मे पड़िहार अपनी तंत्र विद्या से उन लोगों की मुश्किलें भी दूर करते देखे गए जिन्हें ऊपरी बाधा का असर बताया जाता था। बड़ी संख्या मे आदिवासी लोग भी मेले मे शरीक हुए और उन्होंने घरेलु सामान की जमकर खरीदारी की। सीप नदी के तट पर स्थित चमत्कारिक  कुंड मे सुबह-सुबह लोगों ने डुबकियाँ लगाते हुए मेले की परंपरा को कायम रखा।शनिवार को दोपहर तीन बजे तक मेला सुचारु रुप से जारी रहा मेले मे असुविधाजनक परिस्थिति से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा  विशेष व्यवस्था की गई थी लेकिन प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था नाकाफी सिद्ध हुई।बस गनिमत यही रहा कि कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई।कुल मिलाकर अंधविश्वास और आस्था से ओतप्रोत उक्त मेले का दोपहर तीन बजे समापन हो गया। भूतड़ी अमावस्या को कालिया देव कुंड के पानी से स्नान का विशेष महत्व बताया जाता है। इसी वजह से दूर-दूर से ग्रामीण यहां पहुंचते हैं।
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