पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने दिखाई मनमानी, 

पांच सौ से अधिक जिले के स्वच्छताग्राही हुए प्रभावित,

 स्वच्छता ग्राहियों के स्थान पर रोजगार सहायकों को बना दिया फेसीलेटर

सीहोर 22 अक्टूबर, 2019
एमपी मीडिया पाइंट

ग्राम पंचायतों में घर-घर जाकर स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने और  गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर ओडीएफ घोषित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका   निर्वाहनकर्ता पांच सौ से अधिक स्वच्छता ग्राहियों के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के द्वारा अन्यायपूर्ण रवैया अख्तियार करने क‍ मामला सामने आया है।  स्वच्छता ग्राहियों प्रेरकों को ही फेसीलेटर बनाने के निर्देश शासन के द्वारा जारी किए गए थे लेकिन निर्देशों के उलट अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायकों को हीं फेसीलेटर बना दिया। जनसुनवाई में मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे स्वच्छताग्राहियों ने डिप्टी कलेक्टर वरूण अवस्थी को आवेदन प्रस्तुत कर मामले से अवगत कराया।


सबकी योजना सबका विकास के तहत 2 अक्टूबर  से 31 दिसंबर 19 तक अन्त्योदय एप सर्वे और ग्राम पंचायत विकास योजना जीपीडीपी वर्ष 2020 से 021 तक तैयार करने के निर्देश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के द्वारा दिए गए है। निर्देश के मुताबिक ऑनलाईन एप पर कार्य का अनुभव रखने वाले स्वच्छताग्राहियों का ही फेसीलेटर के लिए चयन किया जाना है लेकिन निर्देशों को बला-ए-ताक़ रखकर अधिकारियों द्वारा स्वच्छता जागरूकता को लेकर सक्रीय  स्वच्छता ग्राहियों के स्थान पर रोजगार सहायकों का जनपद स्तर पर फेलीलेटर के पद पर चयन कर दिया गया। जबकि  गांवों में बीते वर्ष से ही शौचालय का सत्यापन प्रक्रिया में फॉलोअप करते हुए जनसमुदाय के स्वच्छता के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने का कार्य स्वच्छता ग्राही कर रहे है। 
स्वच्छता ग्राहियों का कहना था की अगर फेसीलेटर रोजगार सहायक को बनाया जाता है तो इसका असर ग्रामीण स्वच्छता मिशन पर पड़ेगा और स्वच्छताग्राहियों का मनोबल भी कम होगा। 

आज सौंपे आवेदन मे स्वच्छता ग्राहियों ने निर्देशों का पालन करते हुए रोजगार सहायकों के स्थान स्वच्छता ग्राहियों फेसीलेटर बनाने की मांग की है।
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