केव्हीके सेवनिया मे उर्वरक उपयोग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

इछावर 22 अक्टूबर, 2019                         एमपी मीडिया पाइंट

सीआरडीई  कृषि विज्ञान केन्द्र, सेवनिया सीहोर द्वारा उर्वरक उपयोग जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र, सेवनिया प्रक्षेत्र पर किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में जिले से लगभग 240 कृषक,सलाकार आईसीएफआरआई देहरादून जितेन्द्र सिंह, प्रमुख वैज्ञानिक संदीप टोडवाल, कृषि विज्ञान केन्द्र वैज्ञानिक जेके कनौजिया,व केन्द्र के अन्य वैज्ञानिकगण उपस्थित रहे। 


कार्यक्रम में तकनीकी सत्र के दौरान संदीप टोडवाल, प्रमुख व वैज्ञानिक, मृदा विज्ञान ने कृषकों को मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं फसल पोषण में मिट्टी परीक्षण का महत्व, पोषक तत्वों की दक्षता बढाने हेतु खादों व उर्वरकों का मिलाजुला उपयोग व जैविक  उर्वरकों का उपयोग आदि पर विस्तार से चर्चा कर कृषकों को जागरूक किया। आपने कहा कि उच्च गुणवत्ता युक्त कम्पोस्ट बनाये व इससे अधिक लाभ कमाया जा सकता है। आपने कृषकों को जैविक खेती के प्रति जागरूक किया। 
     
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कृषको व वैज्ञानिको, अधिकारियों, विद्यार्थियों को डीडी किसान द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एवं माननीय उर्वरक मंत्री द्वारा संबोधन दिखाया व सुनाया गया।
     
तकनीकी सत्र के दौरान जेके कनौजिया, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र ने उपस्थिति कृषकों को शासन द्वारा संचालित योजनाओं जैसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री जल सिंचाई योजना, पशुओं में टीकाकरण, वर्ष 2022 तक कृषकों की आय को दोगुना करना, किसान सम्मान निधि योजना आदि विशेष अभियान के माध्यम से कृषकों को सीधे लाभ पहुॅचाया है। कृषि विज्ञान केन्द्र का प्रयास है कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का अधिकाधिक प्रसार प्रसार कर कृषकों में जागरूकता लाये। जितेन्द्र सिंह ने फसल ने फसल प्रणाली में दलहनी फसलों जैसे चना, अरहर, उडद, मूॅग आदि का समावेष कर लाभ प्राप्त करने के प्रति जागरूक किया। उन्होने कृषको को प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग के प्रति जागरूक किया।

कार्यक्रम के अंत में कृृषको को प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान केन्द्र पर प्रदर्षित तकनीको जैसे- अमरूद की अति सघन बागवानी, आॅवला बागवानी, सीताफल बागवानी, संतरा बागवानी व उद्यानिकी फसलों के मध्य अन्तरवर्ती फसल अदरक व हल्दी का उत्पादन, जल संरक्षण व मृदा संरक्षण, केंचुआ खाद उत्पादन, नाडेप खाद उत्पादन, उन्नत पशुपालन, मुर्गीपालन आदि तकनीको पर विस्तार से चर्चा कर वैज्ञानिकों द्वारा कृषको में आय को दोगुना करने हेतु जागरूक किया गया। भ्रमण के दौरान कृषको द्वारा तकनीको के संदर्भ में कई प्रश्न
 किये गये जिनका प्रभावी तरीके से वैज्ञानिक़ द्वारा निदान किया गया।
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