आवागमन की अड़चनों के बीच बाराहखंबा मेला आरंभ,रास्ते मे कई जगह कीचड़, ग्राम खेरी मे यात्रियों के लिए चाय सेवा, फिलहाल मेले मे उम्मीद से कम भीड़,

इछावर, 28 अक्टूबर 2019                       राजेश शर्मा, शिवराजसिंह राजपूत,सूरज वर्मा 

आज 28 अक्टूबर सोमवार को लगता है जैसे 'रवि' इछावर तहसील के धार्मिक स्थली देवपुरा के लिए की उदित हुआ हो। लगता है सूरज की पहली किरण हजारों श्रद्धालुओं के स्वागत मे दिलचस्प छटा बिखेर रही हो। भगवान सूर्यनारायण ने आज देर से करीब सुबह 9:30 बजे दर्शन दिए। प्रशासन की ओर से सबसे पहले इछावर एसडीएम प्रगति वर्मा ने प्रशासनिक अमले के सांथ मेला स्थल पर दस्तक दी और वह लगातार व्यवथाओं का जायजा ले रही हैं।

चमत्कारिक बारहखंबा वाले महाराज के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का धीरे-धीरे तांता लगना शुरु हो गया। देवप्रतिमा का दूध से स्नान जारी है। बारहखंबा मेले मे बड़ी संख्या मे महिलाएं भी पहुंच रही हैं।स्थल पर अलसुबह से ही मंदिर परिसर मे भजन-कीर्तन का दौर भी जारी है। नारियल,अगरबत्ती,प्रसाद की दुकानों पर लोगों की अच्छी-खासी देखी जमा होने लगी है।


जाने पुरातनकालीन बारहखंबा मेले के बारे मे

कहा जाता है कि तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर जंगल मे जिसे अब देवपुरा के नाम से जाना जाता है वहां आदिवासी समाज के किसी चरवाहे को पहली बार देव महाराज की प्रतिमा ने दर्शन दिए थे। चरवाहे की पशुटोली मे एक पशु गंभीर रुप से बीमार हो गया था जिसके स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए चरवाहे ने मन्नत मांगी की यदि पशु स्वास्थ्य हो गया तो उसी के दूध से अगले वर्ष आज ही के दिन (यानि दीपावली की पड़वा को) अभिषेक करुंगा।
किवदंती है कि पशु आश्चर्यजनक रुप से उसी दिन ठीक हो गया। दूसरे वर्ष दीपावली के दूसरे दिन पड़वा को पहुंचकर चरवाहे ने देवशिला का दुग्धाभिषेक किया और वर्षभर सभी पशुओं के निरोगी बने रहने की कामना की।
चरवाहे ने पूरा वृतांत गांव पहुंचकर अन्य लोगों को सुनाया। धीरे-धीरे कई पशुपालक देवशिला पर दूध चढ़ाकर पशुओं के सलामती की दुआ मांगने लगे। 

आदिवासी ग्रामीणों ने देवशिला के चारों तरफ 12 खंबे गाड़कर लोहे की चादरों से ढंक दिया। सैकड़ों वर्ष इसी स्वरुप मे कायम रहने से  उक्त धार्मिक स्थान आज भी बाराहखंबा वाले महाराज" के नाम से जाना-पहचाना जाता है। यहां मेला भी भराने लगा जिसे बारहखंबा मेले के नाम से जाना जाता है।
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कल की बारिश ने मजा कुछ किरकिरा किया


इस मेले की खासियत यह है कि प्रदेश के कई सम्भागों से लाखों लोग आदिवासी आराध्य देव की सपाट शिला का अपने दूधारु पशु के दूध से अभिषेक करते हैं और अपने पशुधन के निरोगी रहने की मन्नतें मांगते हैं जो कबूल भी होती हैं इसी वजह से लाखों लोगों की आस्था आज भी बाराहखंबा वाले महाराज पर टिकी रहती हैं। उक्त मेला प्रदेश का सबसे बड़ा एक दिवसीय मेला है और मेले की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। सबसे बढ़ी बात यह है मेला स्थल तक के पहुंच मार्ग इस वर्ष जरुरत से ज्यादा खराब थे जो चिंता का विषय बने हुए थे लगातार 5 दिनों से प्रशासन व्यवस्था को लेकर मेला समिति के संपर्क मे रहा। सुरक्षा-व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर अजय गुप्ता एसपी एसएस चौहान, एएसी समीर यादव, इछावर  एसडीएम प्रगति वर्मा, तहसीलदार आरएस मरावी आदि ने आवश्यक दिशा निर्देश भी जारी किए, लेकिन फिलहाल कल हुई अप्रत्याशित बारिश की वजह से कुछ असुरक्षाओं का सामना यात्रियों को करना पड़ रहा है। 
  
        मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमला 


ग्राम खेरी मे सड़कों पर कीचड़ मचा होने के बावज़ूद यात्रियों के लिए ग्रामीणों ने की चाय सेवा

बतादें कि आज सुबह से ग्राम खेरी के लोगों ने टेंट लगातार बाराहखंबा यात्रियों के लिए चाय सेवा आरंभ की जो अभी भी जारी है। खेरी से बाराखंबा मेला पहुंच मार्ग पर पर बेहद कीचड़ होने के कारण यात्रियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। 


              ऐसे शुरुआत हुई मेले की


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