राम के देश की दिशा और दशा पर संकट के बादल,
अब मध्यप्रदेश सरकार भी पकड़ेगी विरोध की राह

    


शैलेश तिवारी 

इन दिनों राजनीति बड़े ही अजब गज़ब तरीके से हो रही है। किसी जमानें में काला जादू का जो जोर और असर हुआ करता था वैसा जादू और असर अब राजनीति से किया जा रहा है। राजनीति के जादुई असर को अगर गहरे से देखना हो तो आप इस नजरिये से देख सकते हैं कि भारत में अब आपको भारतीय खोजने पर भी शायद ही मिले। जो मिलेगा वो किसी न किसी पार्टी या नेता का गुणगान करता मिलेगा या फिर उसके विपक्षी दल को कोसता नजर आएगा। यही विडंबना हमारी हकीकत बनती जा रही है। 

ताजा मुद्दा लीजिए न सीएए का.... जिसे पारित किया भारतीय संसद ने.... लागू होगा भारत सरकार के मार्फत...। लेकिन इस को माना भाजपा का एजेंडा जा रहा है..। .... और इसका विरोध हो रहा है...। विरोध करने के तर्क सुने तो लगते वो भी सही हैं..। असम से करना था घुसपैठीयों को बाहर तो आया एन आर सी .... 19 लाख अवैध रहने वालों में से 14 लाख निकले हिंदू.... यही तो है भाजपा का वोट बैंक....। इन्हें नागरिकता देने लाए.... सी ए ए...। यहीं एक तर्क विरोधियों को और मिला.... कि इनमें से मुस्लिम को बाहर किया जाना भारत के संविधान के खिलाफ है... संविधान जाति धर्म के आधार पर नागरिकों का वर्गीकरण नहीं करता...। 
असम से शुरू हुई एक्ट के विरोध कि अग्नि धीरे धीरे देश भर में फैल गई...। नागरिकों के विरोध करने के साथ साथ राजनीतिक दलों ने भी विरोध करना शुरू किया। खास कर उन राज्यों में जहाँ भाजपा सत्ता से बाहर है। शुरुआत केरल से हुई जहाँ विधानसभा ने बाकायदा प्रस्ताव पास करके विरोध जताया। 
फिर तो इस तरह के विरोध करने वालों में पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल के साथ छत्तीसगढ़ का नाम भी जुड़ने लगा। और अब मध्य प्रदेश कि कमलनाथ सरकार ने भी एलान कर दिया है कि आगामी दिनों में विशेष सत्र बुलाकर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जाएगा। उधर महाराष्ट्र सरकार के चीफ ने इस तरह के प्रस्ताव पारित करने से इंकार करते हुए अपना विरोध तो जताया है। 
असल दिक्कत यह है कि इस तरह राज्यो का केंद्र सरकार के खिलाफ जाना भारत के संघीय ढांचे के लिए सुखद होना तो कतई नहीं माना जा सकता। इसका पटाक्षेप क्या होगा और कैसे होगा.....। जनता भी सरकार के खिलाफ है और राज्य सरकार भी। टकराव से देश की दिशा भी भटकनी तय है तो दशा खराब होना भी निश्चित है। दुनिया में सारे युद्ध इस मुद्दे पर ही लड़े गए हैं और लड़े भी जाएंगे कि लड़ने वाला हर पक्ष सही है...। एक भी पक्ष अपनी गलती की तरफ देखने को तैयार नहीं...। ऐसा ही इस कानून को लेकर देश में माहौल बना हुआ है। आखिर देश किस दिशा.... में जा रहा है... किस दशा को प्राप्त होगा....? राम जी का देश है.... क्या राम जी ही जाने???
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