संतोष जैन

।। जग जाओ तुम ।।
 मेरे वतन के नौजवानो जाग जाओ तुम ,
 आग जो लगी है चमन में बुझाओ तुम ।              जाति और पंथ में उलझ कर न तुम रहो ,
 राष्ट्र धर्म के लिए लड़ो जियो मरो ।
 प्रेम एकता के मधुर गीत गाओ तुम ।।
                                   आग जो .....            
  दे रही आवाज तुम्हे माता भारती ,
संस्कृति बचाओ ये रह - रह पुकारती ।      भारत की आन-बान पे कुर्बान जाओ तुम ।।                         आग जो ......
आज  आगया  है वक्त देश भक्ति का ,
 शत्रु को करा दो ज्ञान अपनी शक्ति का ।  वक्त न गवाओ रण में कूद जाओ तुम ।।
                          आग जो.........    
माँ की तरफ हाथ उठे तोड़ डालना ,
बुरी नजर उठे कोई तो फोड़ डालना ।
दूध न लजाओगे सौगन्ध खाओ तुम ।।
                   आग जो ........।
     
गीतकार - संतोष जैन " सन्तु "              32 -वैशाली नगर सीहोर ( मध्यप्रदेश )
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