लेखिका 

जब तेरा इनकार नहीं था!
कैसे कहती प्यार नहीं था!

हर बात जुबां से बोली जो,
बोलो क्या इजहार नहीं था!

पी लेती मैं गम का प्याला,
पीने से इनकार नहीं था !

कुछ रिश्तें ही दिल से जोड़े,
जिनपर भी अधिकार नहीं था!

पढ़ते  कैसे  सारी  बातें ,
दिल मेरा अख़बार नहीं था!

तूने जब मझधार में छोड़ा,
हाथों में पतवार नहीं था !

जुड़कर तुझसे ही जाना ,
ख्वाबों का संसार नहीं था!

मोहिनी गुप्ता, गोला गोकर्णनाथ लखीमपुर उत्तरप्रदेश

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मोहिनी निखिल गुप्ता गृहिणी हैं और साहित्य सेवा के लिए समय निकलती हैं। आपका एक काव्य संग्रह भाव भागीरथी प्रकाशित हो चुका है। आपने एम पी मीडिया पॉइंट के लिए अपनी रचना प्रकाशित किए जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है। 
आपका आभार..... संपादक शैलेश तिवारी
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