लेखक 

बेटी सृष्टि का आधार
बेटी  सुखमय उच्च विचार
बेटी सपनों का संसार
 बेटी है जीवन का सार
 बेटी बचेगी तो यह थल है
 बेटी हर क्षण हर  पल है
 बेटी है तो कल है
 बेटी घर आंगन की छैया
 बेटी पार लगाए दो कुल की नैया
बेटी कल कल है निर्झर की
 बेटी कल है नहीं है घर की
 बेटी गंगा का पावन जल है
 बेटी है तो कल है
बेटी बस बेटी  होती है
 बेटी परिभाषा से परे होती है
 बेटी शब्द न कोई वाक्य विन्यास
बेटी सकल जगत की आस
बेटी  सत कर्मों का फल है
बेटी है तो कल है
बेटी  ईश्वर का वरदान
 बेटी बढ़ाए हम सब का मान
बेटी जीवन का संबल है
बेटी हर सवाल का  हल है
 बेटी है तो कल है

                             - हरिओम शर्मा दाऊ


बतादें कि हरिओम शर्मा सीहोर जिले के शिक्षा विभाग से सेवानिवृत हैं। दाऊ साहित्य की सेवा में भी संलग्न रहे हैं। आपके प्रेरणादायी गीतों को आज भी बैठकों में गाया जाता है। उन्होंने एमपी मीडिया पॉइंट के साहित्य कॉर्नर के लिए अपनी सेवाएं देना सहर्ष स्वीकार किया है।
हम आभारी हैं।  
                              संपादक शैलेश तिवारी 
Share To:

Post A Comment: