स्व. इंदीवर
तेरे चेहरे में वो जादू है.......
..... बिन डोर खिंचा आता हूँ...
धर्मात्मा.... 1975 में आई फिरोज खान की फिल्म....। जिसमें हीरो वो खुद हैं तो नायिका के रूप में स्वप्न सुंदरी....जिसे आज की पीढी ड्रीम गर्ल के रूप में समझ सकती है, हेमा मालिनी हैं..। फिल्म के गीत लिखे हैं इंदीवर ने... जो झाँसी के रहने वाले थे.. और असली नाम श्यामलाल बाबू राय के नाम से जाने जाते थे... एक फकीर के साथ जिंदगी का फक्कड़ अंदाज जीने वाले... इंदीवर... आज़ादी के पहले के भारत में सांस ले रहे थे... तब ब्रिटानिया हुकूमत की खिलाफत... युवाओं को खासी रास आती थी... इन्हे भी आई और आज़ाद के नाम से आजादी के तराने लिखने लगे..... जेल यात्रा भी हुई.. लेकिन चाह थी मन में... फिल्मी गीतकार बन जाने की... एकलव्य की तरह फिल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी को अपना गुरु मान लिया... और मुंबई जाकर संघर्ष का सफर शुरू कर दिया..।
1946 में हालांकि उन्हें चांस मिल गया लेकिन वापस अपने गाँव बरुआ सागर लौटना पड़ा...। असली सफलता उन्हें मिली 1951 में लिखे गीत ... बड़े अरमान से रक्खा है सनम, प्यार की दुनियाँ में ये पहला कदम...। इसके बाद तो उनके गीतों की धूम मच गई..।
होंठों से छू लो तुम, चंदन सा बदन चंचल चितवन, फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो, कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, है प्रीत जहाँ की रीत सदा, जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे, दुश्मन न करे दोस्त ने जो काम किया है, बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम जैसे सुपरहिट गीत देने वाले स्वतंत्रता सेनानी कवि इंदीवर की (27 फरवरी) पुण्यतिथि है। एम पी मीडिया पॉइंट की तरफ से यह उनके लिए आदरांजलि है... उनके साहित्य में योगदान की... देश की सेवा के संकल्प के लिए..। ये अलग बात है कि सरकार ने उन्हें आजादी के दो दशक बाद उन्हें स्वतन्त्रता सेनानी माना.. अफसोस....।
इस फिल्म में संगीत दिया था प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी कल्याण जी आनंद जी... इनके बारे में हम फिर कभी बात करेंगे...। गीत को गाया है... किशोर दा ने... अपने मस्ती भरे अंदाज में....।
रेगिस्तान के कच्चे रास्ते पर धूल उड़ाती एक जीप... आकर रुकती है.. नायक जीप में खडा होकर... रेशमा.... रेशमा... रेशमा... तीन बार पुकारता है.... और प्रारम्भिक संगीत के साथ मरुथल में.... पानी की झील नजर आती है.... और नज़र आता है भेड़ों का रेवड... फिर प्रकट होती है नायिका... टीले की चोटी पर... और नीचे खडा नायक.... शुरू करता है गाना.... सच में गीत, संगीत और गायन के साथ गाने का फिल्मांकन इतना खूबसूरत किया गया है कि, फागुनी बयार में.. जी उडकर वहीं पहुँच जाता है.... श्रृंगार का यह गीत जिस उल्लास और उमंग के भाव मन में जगाते हैं... उनको शब्द देना कठिन है...।
शैलेश तिवारी
संपादक
तेरे चेहरे में वो जादू है.......
..... बिन डोर खिंचा आता हूँ...
धर्मात्मा.... 1975 में आई फिरोज खान की फिल्म....। जिसमें हीरो वो खुद हैं तो नायिका के रूप में स्वप्न सुंदरी....जिसे आज की पीढी ड्रीम गर्ल के रूप में समझ सकती है, हेमा मालिनी हैं..। फिल्म के गीत लिखे हैं इंदीवर ने... जो झाँसी के रहने वाले थे.. और असली नाम श्यामलाल बाबू राय के नाम से जाने जाते थे... एक फकीर के साथ जिंदगी का फक्कड़ अंदाज जीने वाले... इंदीवर... आज़ादी के पहले के भारत में सांस ले रहे थे... तब ब्रिटानिया हुकूमत की खिलाफत... युवाओं को खासी रास आती थी... इन्हे भी आई और आज़ाद के नाम से आजादी के तराने लिखने लगे..... जेल यात्रा भी हुई.. लेकिन चाह थी मन में... फिल्मी गीतकार बन जाने की... एकलव्य की तरह फिल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी को अपना गुरु मान लिया... और मुंबई जाकर संघर्ष का सफर शुरू कर दिया..।
1946 में हालांकि उन्हें चांस मिल गया लेकिन वापस अपने गाँव बरुआ सागर लौटना पड़ा...। असली सफलता उन्हें मिली 1951 में लिखे गीत ... बड़े अरमान से रक्खा है सनम, प्यार की दुनियाँ में ये पहला कदम...। इसके बाद तो उनके गीतों की धूम मच गई..।
होंठों से छू लो तुम, चंदन सा बदन चंचल चितवन, फूल तुम्हें भेजा है ख़त में, प्रभु जी मेरे अवगुन चित ना धरो, कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, है प्रीत जहाँ की रीत सदा, जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे, दुश्मन न करे दोस्त ने जो काम किया है, बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम जैसे सुपरहिट गीत देने वाले स्वतंत्रता सेनानी कवि इंदीवर की (27 फरवरी) पुण्यतिथि है। एम पी मीडिया पॉइंट की तरफ से यह उनके लिए आदरांजलि है... उनके साहित्य में योगदान की... देश की सेवा के संकल्प के लिए..। ये अलग बात है कि सरकार ने उन्हें आजादी के दो दशक बाद उन्हें स्वतन्त्रता सेनानी माना.. अफसोस....।
इस फिल्म में संगीत दिया था प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी कल्याण जी आनंद जी... इनके बारे में हम फिर कभी बात करेंगे...। गीत को गाया है... किशोर दा ने... अपने मस्ती भरे अंदाज में....।
रेगिस्तान के कच्चे रास्ते पर धूल उड़ाती एक जीप... आकर रुकती है.. नायक जीप में खडा होकर... रेशमा.... रेशमा... रेशमा... तीन बार पुकारता है.... और प्रारम्भिक संगीत के साथ मरुथल में.... पानी की झील नजर आती है.... और नज़र आता है भेड़ों का रेवड... फिर प्रकट होती है नायिका... टीले की चोटी पर... और नीचे खडा नायक.... शुरू करता है गाना.... सच में गीत, संगीत और गायन के साथ गाने का फिल्मांकन इतना खूबसूरत किया गया है कि, फागुनी बयार में.. जी उडकर वहीं पहुँच जाता है.... श्रृंगार का यह गीत जिस उल्लास और उमंग के भाव मन में जगाते हैं... उनको शब्द देना कठिन है...।
शैलेश तिवारी
परिचय
इस गीत को सीहोर नगर के कराओके गायक दीपक बेलानी आपके लिए लेकर आए है... व्यापारी होने के साथ.. गाने का शौक पूरा करने के लिए.. कुछ पल चुरा लेते हैं जीवन की आपा धापी से... और यादगार बना लेते हैं.. उन लम्हों को... जो आपके लिए भी याद बन जाए... बीते दिनों की... जो भुलाने पर भी भूली नहीं जाती.... आइये आप भी जी लिजिए... उन लम्हों को.. जो आपके अपने हिस्से के हैं.....संपादक


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