लेखिका 

सुनो ना


मैं अब तक 
उस राह को ताक़ रही हूँ 
जिससे तुम चले गए थे 
सुनो तुमने कहा था 
तुम लौट आओगे ......

मैं अब तक अपने आप 
को ज़िंदा रखे हूँ 
तुमसे मिलने के लिए 
सुनो तुमने कहा था 
तुम लौट आओगे .....

मैं अब भी सांसे ले रही हूँ 
अपने जज़्बातों को 
काबू किये हुए हूँ 
सुनो तुमने कहा था 
तुम लौट आओगे ......

मुझे उम्मीद है 
मैं अब भी तुम्हारा इंतज़ार 
कर रही हूँ 
कि तुम लौट आओगे
सुनो अब तुम लौट आओ ना ...........

आभा चन्द्रा, लखनऊ

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परिचय

महिला विद्यालय डिग्री कालेज के सायबर कैफे की इंचार्ज और एमपी मीडिया पॉइंट की आज की साहित्यिक विभूति... आभा चंद्रा जी.... लखनऊ उत्तर प्रदेश से हैं... आपके एक दर्जन साँझा काव्य, ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। दो हाइकू साँझा संग्रह भी आ चुके हैं। साहित्य सेवा के सफर में... आपको सम्मान के कई मकाम भी हासिल हुए हैं.... हमारे साथ जुड़ने के लिए हम उनके प्रति आभार प्रकट करते हैं, आपका स्वागत है आभा चंद्रा जी..। 
शैलेश तिवारी
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