आज रात बारह बजे से इक्कीस दिन का पूरे देश में लॉक डाउन

मेडिकल सेवाओं के लिए 15 हजार करोड़ का प्रावधान करने की घोषणा 

कोरोना की संक्रमण की सायकिल तोड़ने के लिए ये बंधन जरूरी 

21 दिन नहीं संभले तो इक्कीस साल पीछे चले जाएंगे

नई दिल्ली, एमपी मीडिया पॉइंट 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रात बारह बजे से इक्कीस दिन का पूरे देश में लॉक डाउन किए जाने की घोषणा की है। उन्होंने मेडिकल सेवाओं के लिए 15 हजार करोड़ का प्रावधान करने की घोषणा का जिक्र भी किया। नागरिकों से आवाहन करते हुए वह बोले कि कोरोना की संक्रमण की सायकिल तोड़ने के लिए ये बंधन जरूरी है। इन 21 दिन में हम नहीं संभले तो इक्कीस साल पीछे चले जाएंगे। जिसमें आप भी शामिल हैं, आपका परिवार और आपका देश भी शामिल है। 

 उन्होंने शुरुआत में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू में पब्लिक के योगदान पर भारत वासियों को प्रशंसा का पात्र बताया। समर्थ देशों की बेबसी और कोरोना उनके लिए चुनोती बना। प्रभावी मुकाबला एक दूसरे से दूर रहना। इसके अलावा कोई तरीका नहीं। सोशल डिस्टेंसिग सबके लिए जरूरी है चाहे वो पीएम ही क्यों न हो। इसमें लापरवाही देश को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। कितनी होगी... अंदाज लगाना मुश्किल है। आज रात बारह बजे से पूरे देश में संपूर्ण लॉक डाउन होने जा रहा है। घरों से बाहर निकलने पर पूरी पाबंदी रहेगी। यह एक तरह से कर्फ्यू ही है। जो बहुत सख्त रहेगा। यह जरूरी है। हर भारतिय के जीवन को बचाना सरकार की प्राथमिकता है। आपसे प्रार्थना है जहाँ हैं वहीं रहे। तीन सप्ताह का होगा लॉक डाउन। ये इक्कीस दिन का समय कोरोना की सायकिल तोड़ने के लिए बहुत आवश्यक हैं। नहीं संभलने पर तबाही ज्यादा होगा। अपने ही घर में रहे कहीं न जाएं..। एहित्यात बरतने की सलाह देते हुए पीएम ने एक पोस्टर का उल्लेख किया। 
को... कोई
रो..... रोड 
ना.....  ना निकले ...। 
कोरोना के लक्षण दिखने में कई दिन लग जाते हैं। तब तक वह कई लोगों को संक्रमित कर देता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन का आंकडा है। पहले एक लाख लोग संक्रमित होने में 67 दिन लगे लेकिन अगले एक लाख तक मात्र 11 दिन में फैल गया। इसके फैल जाने पर रोकना मुश्किल होता है। हालत बेकाबू हो जाते हैं। जैसा इटली अमेरिका आदि विकसित देशों में हुआ। ये देश कोरोना को नही रोक पाए। फिर उम्मीद की किरण उन देशों के अनुभव हैं जहाँ कोरोना को रोका जा सका है। वो तरीका एक दूसरे से दूरी बनाये रखना है। हमें घर से बाहर नहीं निकलना है। घर में ही रहना है। यह देश के हर नागरिक पर लागू होगा। इस आपदा को कितना कम कर सकते हैं यह संकल्प और संयम से संभव है। धैर्य और अनुशासन की घडी है। अपना वचन निभाने की...। खुद को खतरे में डालकर काम करने वालों के बारे में सोचिये जो एक एक जीवन को बचाने के लिए अस्पताल में काम कर रहे हैं। वायरस का नामो निशान मिटाने का संकल्प है घर पर रहना। इस मौके पर इन्होंने मेडिकल स्टाफ्, पुलिस, सफाई कर्मी, मीडिया कर्मी आदि की जमकर तारीफ की। 
आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाएंगे। गरीबों की मदद के लिए सब आगे आ रहे हैं। जीवन बचाने के लिए जो जरूरी है वह करना ही होगा। 15 हजार करोड़ का प्रावधान मेडिकल संसाधन जुटाने के लिए किया गया है। सभी राज्यों की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाएं होना चाहिए। अफवाहों और अंधविश्वास से बचने की भी सलाह दी। बिना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा न लें। प्रशासन के निर्देशों का पालन करें... आपके जीवन, आपके परिवार की रक्षा के लिए जरूरी है। संकट का सामना करते हुए विजय का संकल्प लें। इन बंधनों को स्वीकार करें।
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