लेखिका 

कर्फ्यू था ,एकांत का  


जब वो मुझे मिला
एक चिड़िया ने उसकी आवाज सुनकर
कर्फ्यू खत्म किया.....

साठ दिन की बातचीत के बाद
मैंने ही कहा
मुझे तुमसे प्रेम है.....
जवाब मिला---
शाम तक सोच के बताऊंगा
इतिहास नीम बनकर
बैठा था उसके होंठो पर
इसलिए हाँ बोलना कठिन था।

उसके घर के पास वाली नदी
गुजरने वाली हवा
महकने वाली शाम
सभी ने हाँ कहा-

ना का जख्म देने से बेहतर
उसने कर्फ्यू लगा दिया
और पैदा की सिहरन

 मैं
आज भी उस चिड़िया के इंतज़ार में हूँ
जो गुम हुई थी किसी शाम

सोनिया बहुखंडी

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परिचय 

सोनिया बहुखंडी... कानपुर उत्तरप्रदेश की रहने वाली हैं। कविताएँ, लघुकथा आदि के लेखन के माध्यम से आप साहित्य सेवा करती रहती हैं।  एमपी मीडिया पॉइंट के लिए आपने रचना प्रेषित की हैं। आपका स्वागत है।
संपादक 
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