शैलेश तिवारी 

इतिहास का दोहराना.... सरकार का जाना

मध्य प्रदेश के सियासी ड्रामे के दृश्य.... लगातार बदल रहे हैं..... पल पल में बदलते ये मंजर... किसी के दिल की धड़कन बढ़ा रहे हैं.... तो किसी का दिल बल्लियों उछल रहा है.... होली से दूरी बनाने वाले राजनीति के शौकीनों के लिए..... टीवी दर्शनीय हो गया... चौराहे के पटियों पर बैठने वालों के लिए.... मानसिक विलास की जुगाली भी तैयार हो गई....। गुजिस्तां वक्त.... इतिहास तो कहलाता ही है... कभी कभी आईना भी बन जाता है....। 
आईना 1967 का है.... और उस पर तस्वीर उभर रही है.... 2020 की.....। टी -20 के साल में प्रदेश की राजनीति भी उसी अंदाज में खेली जा रही है.....। मैच का पलड़ा भाजपा की तरफ झुका नजर आ रहा है तो... कांग्रेस की कोशिश इसे... सुपर ओवर के रोमांच तक ले जाने की है.....। जहाँ थम जाती हैं.... या उखड़ जाती हैं साँसे.....। छाती धोन्कनी की तरह साँसों के उतार चढ़ाव से फूलने पिचकने लगे.....। हालांकि जानकार इस रोमांच को खारिज कर रहे हैं.... लेकिन कांग्रेस की विधायकों की जयपुर यात्रा तो यही बता रही है....। बहरहाल हम बात कर रहे हैं इतिहास के आईने की.....। 
जब ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी राजमाता सिंधिया ने वर्ष 1967 में कांग्रेस के मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र की सरकार गिरा दी थी। एक सभा में राजघरानों के खिलाफ मुख्यमंत्री मिश्र की एक टिप्पणी से कांग्रेस की सांसद विजयराजे सिंधिया सख्त नाराज हो गई थीं। यह जानकारी भी बताई जाती है कि उस समय छात्र आंदोलन चल रहा था और उसी वक्त पचमढ़ी में युवा कांग्रेस का आयोजन किया था, जिसका शुभारंभ करने इंदिरा गांधी आई थी। राजमाता वे समय कांग्रेस में हुआ करती थी। वो वहाँ पहुंची और सी एम मिश्र से मिलने की जद्दोजहद कर सफलता पाई..। बताते हैं वे समय सीएम ने राजमाता के प्रति बेरुखी भी दिखाई और उनके ग्वालियर एस पी को हटाए जाने के अनुरोध को भी दरकिनार कर दिया। 

डी.पी मिश्र के बाद मुख्यमंत्री बने गोविंद नारायण सिंह मिश्र मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से नाराज थे। 1967 के आम चुनाव के बाद तो राजनीति के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले द्वारका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार तो बन गई, पर वो सिर्फ 4 महीने ही चल सकी। 8 मार्च, 1967 से 29 जुलाई, 1967 तक ही। ऐसे मुख्यमंत्री को राजमाता ने अपदस्थ कर दिया जिन्होंने एक ही साल पहले इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाने में ‘चाणक्य’ की भूमिका निभाई थी। 
 इसी प्रकार उत्तर प्रदेश में किसान नेता चरण सिंह ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ कर चंद्रभानु गुप्त की कांग्रेसी सरकार गिराई। चरण सिंह खुद मुख्यमंत्री बने। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिराने में सिंधिया घराने ने मुख्य भूमिका निभाई। पर मुख्यमंत्री कोई और बना। उन दिनों एक दल-बदलू का तर्क था कि विंस्टन चर्चिल ने भी मतभेदों के कारण 1904 में दल-बदल किया था। पहले वो कंजर्वेटिव पार्टी से चुने गए फिर लिबरल पार्टी में शामिल हो गए थे। 
यानी दल बदल अवसर के अनुसार किया जाना राजनीति की परंपरा रही है और इतिहास का यह आईना बताता ही कि सत्ता बदल देना सिंधिया परिवार की परम्परा है....। हालांकि अभी मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ नहीं है।
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