घिर आई रंग भरी शाम,एक गीत और तेरे नाम।।
कलियो के मधुवन से,गीतों के छ्न्द चुने।
सिंदूरी छितीजो से,सपनो के तार बुने।
लेखिका
तार-तार सपनो का वृंदावन धाम।एक गीत और तेरे नाम।।
ढूंढ ढूंढ कर हारी, दिन तलाशते बिता।
जीवन घट बून्द-बून्द रिसते रिसते रीता ।
रीत रीत कर राधा, बन बैठी श्याम।
एक गीत और तेरे नाम।।
खोज रही बिम्ब एक, सुधियों के दर्पण में।
थिरक रहा पल पल जो इस दिल के आँगन में।
आँगन में करले, जो पल भर विश्राम।
एक गीत और, तेरे नाम
मोनिका हठीला भोजक, भुज, गुजरात
-------------------------परिचय
मोनिका हठीला सीहोर के यशस्वी और आशु कवि स्व. रमेश हठीला की पुत्री हैं। वर्तमान में भुज गुजरात में निवासरत हैं। विगत 25 वर्षों से कई अखिल भारतीय कविसम्मेलनों के मंचो से काव्य पाठ करती आ रही हैं। साथ ही अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं। 2011 में "एक खुशबु टहलती रही" काव्य संकलन भी प्रकाशित हो चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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