विजया पाठक

आइएएस एम.गोपाल रेड्डी मध्यप्रदेश के नये मुख्य सचिव होंगे। रेड्डी को सीएस बनाने की सारी प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। अभी उनको मंत्रालय में ओएसडी बनाया गया है। वर्तमान में पदस्थ मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती का कार्यकाल 31 मार्च 2020 को समाप्त हो रहा है। एसआर मोहंती का कार्यकाल खत्म  होते ही रेड्डी नये सीएस बनाये जाएंगे। नये मुख्य सचिव की दौड़ में कुछ वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों का नाम चल रहा था लेकिन बाजी मारी एम.गोपाल रेड्डी ने। हालांकि रेड्डी को सीएस बनाने में कमलनाथ सरकार ने बहुत जल्द फैसला लिया है। रेड्डी के पिछले कार्यकालों को दरकिनार करते हुए उन्हें प्रदेश का सबसे प्रमुख प्रशासनिक पद देने का फैसला लिया। एम.गोपाल रेड्डी पर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो भोपाल में एफआईआर क्रमांक 36/2012 के मुख्य आरोपी हैं। जबकि इस मामले में ब्यूरो द्वारा न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत चालान में एम.गोपाल रेड्डी का नाम जांच अधिकारी द्वारा जानबूझकर हटाया गया है। लेकिन न्यायालय ने अभी मामले के मुख्य आरोपी एम.गोपाल रेड्डी को क्लीनचिट नहीं दी है और न ही एफआईआर में से आरोपी का नाम एफआईआर से काटा है। यही मामला नहीं अन्य तीन मामलों में भी एम.गोपाल रेड्डी पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। जिसको कि ब्यूरो द्वारा जानबूझ कर लंबित रखा गया है। ये मामले हैं- ग्रेडर मशीनें खरीदी में 35 लाख का घोटाला, वर्ष 2001-03 में म.प्र.राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम भोपाल में प्लास्टिक पोली पाउच खरीदी में 33 लाख 16 हजार का घोटाला और सोयाबीन खरीदी में 40 लाख का आर्थिक घोटाला।
इसके अलावा भी रेड्डी पर भ्रष्टाचार के और मामले दर्ज हैं। इन मामलों को दबाया गया है। ऐसा ही एक मामला है जिसको दबाया गया। यह मामला है UV प्रिंटर टेंडर का। जब इस मामले की पड़ताल की गई तो साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि किस प्रकार से जांच अधिकारी द्वारा तथ्यों को छुपाकर मामले के मुख्य आरोपी को बचाया गया। दरअसल नितिन जैन UV प्रिंटिंग का काम करते हैं। रेड्डी जब आये लघु उद्योग निगम में पदस्थ थे और मध्य प्रदेश माध्यम के आला अधिकारियों से मिलना जुलना होता था। मध्यप्रदेश माध्यम के अफसरों से दोस्ती का फायदा लेते हुए रेड्डी ने UV प्रिंटिंग के मालिक नितिन जैन के लिए फील्डिंग की। तीन फर्मो के मालिक नितिन जैन को 50 रूपये फिट की जगह 250 रु. प्रति फिट रेट का टेंडर मध्यप्रदेश माध्येम से दिलवा दिया। मतलब पांच गुना मंहगा टेंडर दिलवा दिया। इस फर्म में अजय जैन और नितिन जैन पार्टनर हैं। रेड्डी की इन दोनों से अच्छीि दोस्ती है। वर्तमान समय तक इस फर्म को 100 करोड़ का काम दिया जा चुका है। UV प्रिंटिंग का 5 करोड़ के काम का बिल 10 दिन में नहीं हो सकता पर चालान साइन होकर भुगतान कर दिया जाता है। UV प्रिंटिंग का काम इतनी जल्दी नहीं होता है। माध्यम में दो साल तक के लिए UV प्रिंटिंग का टेंडर दे दिया है। जबकि नियमानुसार 1 वर्ष का ही होना चाहिए। जैन ब्रदर्स को UV प्रिंटिंग का टेंडर 10 से 15 दिन में हुआ था। जिससे साफ होता है कि रेड्डी जैन ब्रदर्स को लाभ देना चाहते हैं और उन्होंने अपने संबंधों के जरिए ऐसा किया भी। यह फर्जीवाड़ा करके रेड्डी ने सरकार को करोड़ों रूपये का चूना लगाया है।
एम.गोपाल रेड्डी ने अपने कार्यकाल में जिस भी विभाग में रहे बड़े-बड़े खेल किए हैं। आज इन्हें कमलनाथ सरकार सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर पदस्थ कर रही है जबकि इनके कारनामों से इन पर सीवीसी और सीबीआई जैसी संस्थाओं से जांच करानी चाहिए। इस पद पर पदस्थ करने से पहले रेड्डी का बैकग्राउंड जांचना चाहिए। हम कल्पना कर सकते हैं कि जो अधिकारी छोटे पद पर रहते हुए भी पांच गुना मंहगा दिलवा सकता है तो बड़े पद पर पहुंचकर कितना बड़ा फर्जीवाड़ा कर सकता है या करवा सकता है।
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लेखिका भोपाल से हैं और मप्र की ख्यातनाम पत्रकार हैं।
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