लेखिका
एक व्यापारी था l उसके पास बहुत से जानवर थे l उसे उनसे बहुत स्नेह था l।हाथी,घोड़ा,गाय,बैल,भैंस,कुत्ता, बिल्ली सभी जानवर लगभग l एक ऊँट भी था l
व्यापारी के स्नेह से ऊँट जैसे हमेशा भीगा रहता l पेट की थैली से कम व्यापारी के स्नेह से उसकी प्यास ज़्यादा बुझती l व्यापारी के प्रति उसका प्रेम प्रदर्शित भी करता था ऊँट l
व्यापारी स्वयं भी सभी का बड़ा ध्यान रखता अपने हाथों से उन्हें भोजन देता पानी देता l सहलाता,दुलारता l
सारे जानवर बहुत ही खुश और स्नेह से भरे थे व्यापारी के प्रति l
एक बार बहुत अकाल पड़ा l अपने स्नेह के चलते व्यापारी की जानवरों के प्रति दिनचर्या और समर्पित हो गयी थी l भीषण गर्मी के चलते उसका ज़्यादा वक़्त अन्य जानवरों में ही गुज़रने लगा l वह उनकी दिन भर स्वयं सार-संभाल करता l ऊँट चूँकि अपनी थैली से काफ़ी दिन काम चला सकता है यह सोच व्यापारी ख़ुद उसके पास नहीं जा पाता था अतः वह अपने अर्दली को भेज दिया करता l ऊँट के भोजन पानी का उसे अहसास था मगर वह जानता था कि वहाँ ज़्यादा ख़तरे की बात नहीं क्यूँकि इस स्थिति में ऊँट की सहनशक्ति अन्य जानवरों की अपेक्षा अधिक है l किन्तु फिर भी अर्दली से गाहे-बगाहे वह ऊँट की जानकारी लेता रहता था l अक्सर अर्दली बताता,ऊँट की स्थिति बयाँ करता .....मालिक उसने आज फिर भोजन नहीं किया....मालिक उसने आज पानी नहीं लिया l मालिक को ऊँट की थैली और सहनशक्ति का पता था सो अर्दली को इसके लिए आवश्यक निर्देश देकर बाक़ी स्वयं पूरे जानवरों को सम्हालता सहलाता दुलारता रहा l वक़्त बीता l ऋतु बदली l वर्षा आने के आसार बनने लगे l व्यापारी ने संतोष की साँस ली l और एक दिन बारिश जम कर बरसी l अब व्यापारी को ख़्याल आया कि आज ऊँट से भी मिल लिया जाए और वह ऊँट के बाड़े की ओर चला पड़ा l
मगर अब केवल वहाँ ऊँट का मृत शरीर था और थीं इंतज़ार में पथराई खुली आँखों l
मालिक ने अर्दली को बुलाया उसकी लापरवाही पर बोलने को था ही कि अर्दली बोला...
"मालिक इसे मेरे भोजन या पानी की प्यास न थी बस आपकी नजर और आपके स्नेह की आस थी"
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शैलेश तिवारी
स्नेह की आस
एक व्यापारी था l उसके पास बहुत से जानवर थे l उसे उनसे बहुत स्नेह था l।हाथी,घोड़ा,गाय,बैल,भैंस,कुत्ता, बिल्ली सभी जानवर लगभग l एक ऊँट भी था l
व्यापारी के स्नेह से ऊँट जैसे हमेशा भीगा रहता l पेट की थैली से कम व्यापारी के स्नेह से उसकी प्यास ज़्यादा बुझती l व्यापारी के प्रति उसका प्रेम प्रदर्शित भी करता था ऊँट l
व्यापारी स्वयं भी सभी का बड़ा ध्यान रखता अपने हाथों से उन्हें भोजन देता पानी देता l सहलाता,दुलारता l
सारे जानवर बहुत ही खुश और स्नेह से भरे थे व्यापारी के प्रति l
एक बार बहुत अकाल पड़ा l अपने स्नेह के चलते व्यापारी की जानवरों के प्रति दिनचर्या और समर्पित हो गयी थी l भीषण गर्मी के चलते उसका ज़्यादा वक़्त अन्य जानवरों में ही गुज़रने लगा l वह उनकी दिन भर स्वयं सार-संभाल करता l ऊँट चूँकि अपनी थैली से काफ़ी दिन काम चला सकता है यह सोच व्यापारी ख़ुद उसके पास नहीं जा पाता था अतः वह अपने अर्दली को भेज दिया करता l ऊँट के भोजन पानी का उसे अहसास था मगर वह जानता था कि वहाँ ज़्यादा ख़तरे की बात नहीं क्यूँकि इस स्थिति में ऊँट की सहनशक्ति अन्य जानवरों की अपेक्षा अधिक है l किन्तु फिर भी अर्दली से गाहे-बगाहे वह ऊँट की जानकारी लेता रहता था l अक्सर अर्दली बताता,ऊँट की स्थिति बयाँ करता .....मालिक उसने आज फिर भोजन नहीं किया....मालिक उसने आज पानी नहीं लिया l मालिक को ऊँट की थैली और सहनशक्ति का पता था सो अर्दली को इसके लिए आवश्यक निर्देश देकर बाक़ी स्वयं पूरे जानवरों को सम्हालता सहलाता दुलारता रहा l वक़्त बीता l ऋतु बदली l वर्षा आने के आसार बनने लगे l व्यापारी ने संतोष की साँस ली l और एक दिन बारिश जम कर बरसी l अब व्यापारी को ख़्याल आया कि आज ऊँट से भी मिल लिया जाए और वह ऊँट के बाड़े की ओर चला पड़ा l
मगर अब केवल वहाँ ऊँट का मृत शरीर था और थीं इंतज़ार में पथराई खुली आँखों l
मालिक ने अर्दली को बुलाया उसकी लापरवाही पर बोलने को था ही कि अर्दली बोला...
"मालिक इसे मेरे भोजन या पानी की प्यास न थी बस आपकी नजर और आपके स्नेह की आस थी"
शालिनी श्रीवास्तव
------------------परिचय
शालिनी श्रीवास्तव कोटा (राजस्थान) की निवासी हैं। उच्च शिक्षित और विभिन्न विधाओं से लगाव रखती हैं। साहित्य सेवा में भी आप कई विधाओं में लिखती हैं के और संगीत में भी पारंगत हैं। आपकी टाइम मैनेजमेंट, प्रैक्टिकल मैनेजमेंट, तुम्हारे लिए (काव्य), प्रार्थनाएं संकलन,इंसाफ़ क़ुदरत का (उपन्यास),काव्य एक समीक्षा, काव्य सृजन आदि पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आप साप्ताहिक समाचार पत्र हिलव्यू समाचार की मुख्य संपादक भी हैं। सामाजिक कार्यों में भी आपकी सक्रिय सहभागिता रहती है। एमपी मीडिया पॉइंट पर आपका स्वागत है।--------------
समीक्षा
स्नेह की आस...... शालिनी श्रीवास्तव जी की वह कहानी है... जो आपसी प्रेम की आकांक्षा पर आधारित है। कथानक भले ही व्यापारी और उसके जानवरो पर आधारित है.... लेकिन आज के आपाधापी और भागती दौड़ती जिंदगी में प्रेम का अभाव ही रेखांकित करती है....। हमारी असल जिंदगी में भी या होता है... जिसको हमारी चाह होती है... संयोग से वही हमसे उपेक्षित हो जाता है....। यह होता मानवीय स्वभाव की वजह से ही है... जैसे एक भेड के रेवड को चराने वाले के झुंड से... एक भेड़ छिटक कर दूर हो जाती है... तो चरवाहा उसको खोज कर... अपने कंधे पर उठा लेता है...। बाकी को नहीं उठाता...। ऐसा ही इस कथानक में होता है कि... व्यापारी ऊँट को पानी के मामले में मजबूत समझ कर... कमजोर जानवरो पर ही ध्यान देता रहता है... और उस ऊँट की तरफ से लापरवाह हो जाता है... जो हमेशा दाना पानी के साथ.... प्यार और स्नेह भी पाता था....। लेकिन अकाल में दाना पानी की जरूरत तो नौकर के माध्यम से पूरी होती रही... लेकिन प्यार और स्नेह के अकाल... ने उसके प्राण ले लिए...। कहानी संदेश भी यही देती है कि... परिस्थिति चाहे जैसी हो.... प्यार और स्नेह की बारिश... अकाल में भी जीने की वजह बन जाती है...। अपनो से मिले.... या गैरों से.... सुबह मिले... या शाम मिले.... घर में मिले... या बाहर मिले.... जब भी मिले.... जहाँ भी मिले... प्रेम और स्नेह हमेशा बांटते रहे...। कहानी का यही मर्म... मुझे समझ आया... आशा है... पाठकों को भी यही... मर्म समझ आए... और शालिनी जी की लेखनी के... कथनीय... स्नेह और प्यार की बारिश... सब पर होती रहे....। बधाई शालिनी जी... अच्छे कथानक की....।शैलेश तिवारी


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