लेखिका
मेरे लिए, मेरा !
आसमान खुला छोड़ दो,
दायरें खुद तय करूंगी
मेरी चिंता छोड़ दो..,
उड़ सकूं उन्मुक्त
कर सकूं अभिव्यक्ति
मेरा जीना,मेरा मरना
मुझपे निर्णय छोड़ दो
कर सको तो ,
मुझपे बस अहसान
इतना करना....,
वो नज़र,वो सोच
अपने पास ही धर रखना
दृष्टि जो कुदृष्टि डाले
देह पर ,
जो कुबुद्धी बन पड़ा हो
नेह पर,
अपनी छोटी सोच,
खोटी नीयत अपने
पास रखना,
मेरे हिस्से की खुशी
और होंठों की हंसी
दे,दो मुझको मेरी
हिस्सेवाली मेरी ज़िन्दगी,
विचर सकूं जिस धरा
वो, ज़हान छोड़ दो!
मेरे लिए,मेरा !
खुला आसमान छोड़ दो!!
आर्यावर्ती सरोज "आर्या"लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
----------------परिचय
आज हम साहित्य सोपान में परिचय कराने जा रहे हैं आर्यावर्ती सरोज "आर्या" से... जो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से हैं। आप कवयित्री / कहानीकार / उपन्यासकार / गीतकार के रूप में अपनी साहित्य यात्रा को जारी रखें हुए हैं। आपका उपन्यास -- छोटी मालकिन, कहानी संग्रह -- कुछ पन्ने ज़िन्दगी के, काव्य संग्रह -- सरोज काव्य मंजरी और 16 साझा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी कहानी बूढ़ी अम्मा सी बी एस सी बोर्ड के पाठ्यक्रम में आठवीं कक्षा में शामिल है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।संपादक


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