दिनेश शर्मा,आष्टाएमपी मीडिया पाइंट 


कोरोना जैसी महामारी से बचाव और मुक्ति के लिए सरकार और प्रशासन द्वारा किये जा रहे प्रचार,प्रसार से स्व प्रेरणा लेते हुए गांव गांव जाकर घरो की दीवारों पर ओर सार्वजनिक स्थानों पर बचाव के तरीके और विचार स्वयं के खर्चे से लिख कर अलख जग रहा है । गुलाब सिंह परमार , निवासी अर्नियाराम।

वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर उससे बचाव के लिए शासन प्रशासन जिस तरह से जतन कर रहा है,  ओर  21 दिन का लाक डाउन  वाला प्रधानमंत्री मोदी का आव्हान भी संक्रमण को रोकने का बहुत हद तक कारगर साबित हो रहा है  लेकिन ग्रामीण क्षेत्रो में आज भी शासन, प्रशासन की उदासीनता के चलते इस महामारी के संक्रमण से होने वाली जान लेवा बीमारी व इस संक्रमण से बचाव के बारे में इतनी जाग्रति नही दिखाई दे रही है जितनी कि होना चाहिए ।गांवो में आज भी लोग जहाँ चौपालों पर समूह के रूप में एकत्रित हो रहे है, वही खेतों पर भी अनेकों मजदूर काम कर रहे है ।इतना ही नही गांवो में वह लोग भी आ रहे है जो वर्षो से बड़े शहरो में कार्य कर रहे थे।और इस महामारी के डर से अपने गृहग्रामों में आ गए है ।और मेडिकल जांचों से बच रहे है ।किन्तु-
गांव का ही एक युवक गुलाब सिंह परमार  जो कि पेंटिग जैसी कला में महारत रखता है ।यह युवक शासन, प्रशासन द्वारा  इस जान लेवा संक्रमण वाली बीमारी से बचाव कैसे व किस तरीको से किया जा सकता है  इसके लिए किये जा रहे प्रचार, प्रसार, से स्व प्रेरणा लेकर अपनी पेंटिग वाली कला का सदुपयोग करतेहुए  स्वयं के खर्च से गांव गांव जाकर दीवारों पर इस महामारी से बचाव के तरीकों को लिख कर ग्रामीणों में जागृति लेने का पुनीत कार्य कर रहा है ।इस पेंटर गुलाब सिंह परमार द्वारा  गांवो में घरों पर व सार्वजनिक स्थानों पर लिखे जा रहे स्लोगनों, ओर बचाव के तरीके  अनेको वाट्सअप ग्रुपो में ओर शोशल मीडिया में पड़ने को मिल रहे है । ऐसा भी नही हो सकता कि इस पेंटर द्वारा किया जा रहा पुनीत कार्य की जानकारी स्थानीय प्रशासन को नही हो । जबकि यह युवक अलख जगाने का पुनीत कार्य   आष्टा व इछावर तहसीलों के लगभग 20 गांवों में सेकड़़ों दीवारों पर बचाव के तरीके व सुविचार लिख चुका है।
 और अभी निरन्तर कार्य जारी है । पर आश्चर्य है कि इस युवक को जिम्मेदार प्रोत्साहित भी नहीं कर रहे।जबकि इस युवक से हमने बात की तो उसने बताया की मुझे इस कार्य से बहुत  सन्तोष मिल रहा है ।उसका कहना है कि मेरे इस जन जागृति अभियान से हर गावों में अगर 8 से 10 लोग ही जाग्रत हो गए तो में समझूंगा मेरा  अभियान पूर्ण हो गया । में तो यह चाहता हूँ कि सभी नव युवकों को इस महामारी के बचाव वाले अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए । हम बहुत जल्दी इस वैश्विक बीमारी पर काबू पा लेंगे ।
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