गायिका
तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया......
आज मजरूह सुलतान पुरी की उस शब्द रचना को आपको सुनवाने जा रहे हैं जिस शब्द रचना को गीत कहा गया... 1981 में आई फिल्म "कुदरत" में....। कहने को भले ही यह एक गीत की शब्द रचना नजर आती हो लेकिन सच कहा जाए तो मजरूह साहब ने इस गीत में दिल की धड़कनों को कुछ ज्यादा ही धड़कने पर मजबूर कर दिया है...। खास कर उन लोगों को जिनके जेहन में पहले प्यार की पहली मुलाकात एक संपदा की तरह दिल में सुरक्षित है...। उस पर कमाल किया है पंचम दा यानि राहुल देव वर्मन के संगीत ने....। याद कीजिए गीत के इंट्रो म्युजिक को जब वाद्य यंत्र की थाप दिल की धड़कनों को प्रेमी के मिलन तक की स्थिति तक ले जाती है...। हिंदी फिल्मों के पहले सुपर स्टार फिल्म के हीरो राजेश खन्ना और स्वप्न सुंदरी फिल्म की नायिका हेमा मालिनी बर्फ की वादियों से फिसलते हुए नीचे आते हैं..... यहीं पर इंट्रो म्युजिक खत्म होता है..... और स्वर साम्राज्ञी, भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर गीत की पहली लाइन.... "तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया..... " गाती हैं..... और राहुल देव वर्मन ठीक इसी जगह पर बाँसुरी का वह शानदार संगीत संयोजन करते है, जैसा पूर्ण अवतार भगवान कृष्ण की बाँसुरी का जादू ब्रज की गोपियों पर छा जाता होगा.....। वाकई जादू ही हो जाता है... श्रोता के मन पर...। और मजा लीजिए शब्द रचना का कि नए नजारों में दुनियाँ बदल जाती है। धड़कन का मन में शोर मचाने लगता है और लहराते पानी की लहर तन में उठने लगती है...। इन्हीं बोलो के साथ पंचम दा के संगीत में प्राण फूंकती है लता जी की अल्हड़ पहाड़ी लड़की जैसी कमसिन आवाज.....। कहाँ स्वर को कितनी गहराई से ऊँचा उठाना है ये कमाल लता जी बखूबी कर जाती हैं....। और इससे भी ज्यादा कमाल तो तब नजर आता है जब फिल्म के निर्देशक चेतन आनंद की कल्पना को साकार रूप देते हैं फोटोग्राफर जाली मिस्त्री..... नदिया के पानी की लहर को गीत के साथ क्या कमाल का फिल्माया है... कि दर्शक और श्रोता दोनों ही.... गीत, संगीत, गायन, निर्देशन, फोटोग्राफी और अदाकारी के कुंभ में डुबकी लगाकर खुद को धन्य महसूस करते हैं...। ऊँचे ऊँचे दरख्तों की ऊँचाई में प्रेम की गहराई को खूबसूरती से फिल्माया गया है। शिमला की हसीन वादियों के दिलकश नजारों में दिल बाग बाग हो जाता है....।
हमारे लिए इस गीत को सीहोर की कोकिल कंठी गायिका सीमा जोशी लेकर आई हैं। जो संगीत में मास्टर डिग्री हासिल कर चुकी हैं तो कत्थक नृत्य में प्रवीण हैं। साथ ही अपने समय की बहुत अच्छी बैडमिंटन खिलाडी भी रही हैं...। उन्होंने भी इस गीत को ठीक उसी अंदाज में गाया है कि.... श्रोता का मन गदगद हो जाता है...। तो लीजिए पेश है.... सुरीले गीत का रंगीला जादू..... आपकी खिदमत में....।
शैलेश तिवारी
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