चुनाव में हुए विवाद की वजह से बन गए थे डाकू,
शेष जीवन आध्यात्म के रास्ते पर
पंचम सिंह
विदिशा, एमपी मीडिया पाइंट
चंबल घाटी के कुख्यात डकैत रहे पंचम सिंह ने ब्रम्हाकुमारी के राजयोग से अपना जीवन बदल दिया अब बसंत की तरह लोगों तक शांति भाईचारे का संदेश पहुंचा रहे हैं।
1970 में पंचम सिंह चंबल की घाटी के कुख्यात डाकू रहे उनपर 105 मर्डर 200 डकैती के गंभीर आरोप थे और सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए दो करोड़ का इनाम घोषित किया था।
कल शनिवार को विदिशा के मुखर्जी नगर स्थित प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आए इस दौरान उन्होंने संत बनने के पहले के और अब के अनुभव साझा किए।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर सरकार बनाने और गिराने की धमकी तक दी थी मेने चेलेंज दिया था। जिससे क्रोधित तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चंबल की घाटी में सेना के हेलिकॉप्टर भेजकर डाकुओं को खत्म करने की योजना बनाई थी। लेकिन पंचम सिंह के नेतृत्व में सभी डाकूओं की शान बनकर आसपास के गांवों में चले गए इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री को दूत बनाकर डाकुओं को समर्पण का संदेश भेजा। पंचम सिंह ने 8 मांगें पूरी करने की शर्त पर समर्पण का भरोसा दिलाया, मांगे मानने पर पंचम सिंह समेत चंबल की घाटी के सभी 556 डाकुओं ने आत्मसमर्पण कर दिया था लेकिन सरकार ने पंचम सिंह पर केस चलाया जिससे उन्हें कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई पंचम सिंह बताते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और जयप्रकाश नारायण ने राष्ट्रपति को उनकी फांसी की सजा माफ करने की पैरवी की जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर किया इसके बाद आजीवन कारावास की सजा हुई।
पंचम सिंह ने बताया कि ज्याद्तियां ना होती तो हम डाकू न बनते। ग्रामीणों ने जहर खिलाकर हमारे 20 साथियों को मार दिया। हमने उसका भी बदला लिया। डाकू माधोसिंह ने मुझे गैंग मे शरीक किया था। लेकिन अब आध्यात्म के रास्ते पर हूँ जिससे दिल को बेहद सुकून है। समाजसेवा के दायित्व का निर्वहन कर रहा हूँ।
शेष जीवन आध्यात्म के रास्ते पर
विदिशा, एमपी मीडिया पाइंट
चंबल घाटी के कुख्यात डकैत रहे पंचम सिंह ने ब्रम्हाकुमारी के राजयोग से अपना जीवन बदल दिया अब बसंत की तरह लोगों तक शांति भाईचारे का संदेश पहुंचा रहे हैं।
1970 में पंचम सिंह चंबल की घाटी के कुख्यात डाकू रहे उनपर 105 मर्डर 200 डकैती के गंभीर आरोप थे और सरकार ने उन्हें पकड़ने के लिए दो करोड़ का इनाम घोषित किया था।
कल शनिवार को विदिशा के मुखर्जी नगर स्थित प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय आए इस दौरान उन्होंने संत बनने के पहले के और अब के अनुभव साझा किए।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर सरकार बनाने और गिराने की धमकी तक दी थी मेने चेलेंज दिया था। जिससे क्रोधित तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चंबल की घाटी में सेना के हेलिकॉप्टर भेजकर डाकुओं को खत्म करने की योजना बनाई थी। लेकिन पंचम सिंह के नेतृत्व में सभी डाकूओं की शान बनकर आसपास के गांवों में चले गए इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री को दूत बनाकर डाकुओं को समर्पण का संदेश भेजा। पंचम सिंह ने 8 मांगें पूरी करने की शर्त पर समर्पण का भरोसा दिलाया, मांगे मानने पर पंचम सिंह समेत चंबल की घाटी के सभी 556 डाकुओं ने आत्मसमर्पण कर दिया था लेकिन सरकार ने पंचम सिंह पर केस चलाया जिससे उन्हें कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई पंचम सिंह बताते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और जयप्रकाश नारायण ने राष्ट्रपति को उनकी फांसी की सजा माफ करने की पैरवी की जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर किया इसके बाद आजीवन कारावास की सजा हुई।
पंचम सिंह ने बताया कि ज्याद्तियां ना होती तो हम डाकू न बनते। ग्रामीणों ने जहर खिलाकर हमारे 20 साथियों को मार दिया। हमने उसका भी बदला लिया। डाकू माधोसिंह ने मुझे गैंग मे शरीक किया था। लेकिन अब आध्यात्म के रास्ते पर हूँ जिससे दिल को बेहद सुकून है। समाजसेवा के दायित्व का निर्वहन कर रहा हूँ।


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