लेखक 

क्यों है?


बड़ा ही शांत-शांत पूरे विश्व का मंज़र क्यों है?
आजकल प्रकृति के हाथों में तेज़ ख़ंजर क्यों है?

वर्ल्ड वार की चाह रखने वाला हर एक देश आज,
एक कोरोना के भय से छुपा घर के अंदर क्यों है?

बंद हैं दरवाज़े मंदिर-मस्जिद-चर्च-गुरुद्वारे का,
ख़ौफ़ज़दा पंडित और मौलवी का घर क्यों है?

अगर तरक़्क़ी का पैमाना सिर्फ़ विज्ञान के पास है,
फिर उसके गर्भ में दवा से भी ज़ियादा ज़हर क्यों है?

केवट ने राम को कराया नदी पार और गया स्वर्ग,
पर राम को रास्ता देकर भी खारा ‘सागर’ क्यों है?


-विनोद सागर, जपला।

--------------

परिचय 

विनोद सागर.... जपला हुसैनाबाद झारखंड के निवासी हैं। आप पत्रकारिता में सक्रिय हैं और साहित्य के प्रति सेवा का समर्पण भाव भी रखते हैं। ग़ज़ल और खासकर समसामयिक  मुद्दों पर आपकी रचनाएँ गहरे तक छाप छोड़ने में समर्थ होती हैं । उन्होंने एमपी मीडिया पॉइंट के लिए अपनी रचनाएँ भेजी हैं। आपका स्वागत है...।
Share To:

Post A Comment: