गांवों तक मे भी पहुंच रहा रामायण का संदेश
समसामयिक
शैलेष तिवारी
भसृष्टि के प्रारम्भ में हुए....नाद जैसा संगीत और फिर........ एक लंबा शंखनाद.... साथ में सागर आर्ट का लोगो.... फिर बजती है घंटी... टन.. टन.. टन... इसी तरह तीन बार... जैसे आवाह्न हो.. मन, कर्म और वचन से.. एक होकर श्रद्धा से भर जाने का....। और गूंजती है... ढोलक की थाप.... आस्था की लहरों... में ज्वार लाने के लिए.... इसी के साथ बज उठते हैं.. मंजीरे अपनी मधुर झंकार के साथ... भक्ति को अतरंग तक जाग्रत करते....समूचे वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियों के साथ.... कर्ण पुटों तक... पहुंचती हैं सामूहिक स्वर लहरियाँ....
सीताराम चरित अति पावन...,
मधुर, सरिस अरु अति मन भावन.....।
पुनि पुनि चेतरेहु सुने सुनाए..,
हिय की प्यास बुझे न बुझाए.....।
चौपाई बन गई गीत... लेकिन स्वर्गीय जयदेव के शीर्षक गीत के संगीत निर्देशन ने... अस्सी के दशक के सर्वाधिक देखे गए.... रामानंद सागर के......कालजयी धारावाहिक रामायण... के प्रति श्रद्धा, आस्था और भक्ति की त्रिवेणी... का संगम रच दिया...। प्रयाग के त्रिवेणी संगम.... की तरह यहाँ भी उस दौर के दर्शकों ने डुबकी लगाकर... खूब पुण्य कमाया..। उस समय इस धारावाहिक के प्रति दर्शकों का इतना लगाव था कि....सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था...। वैसे इस धारावाहिक के गीत और संगीत दोनों का जिम्मा... रविंद्र जैन ने बखूबी उठाया... लेकिन शीर्षक संगीत जयदेव ने दिया...। जिसका जादू आज भी सर चढ़कर बोल रहा है....। इसके प्रारंभिक समय पर... घर की छत पर खड़े हो जाएं... मोहल्ले के हर घर से.... यही गीत संगीत की स्वर लहरियाँ सुनाई देंगी..।
रामायण की पहली कड़ी का प्रसारण...25 जनवरी 1987 को हुआ...। 78 कड़ी के इस धारावाहिक का समापन 1988 में हुआ...। 33 साल का लंबा काल खंड... बीतने के बाद विगत 28 मार्च से दूरदर्शन पर.... एक बार फिर से रामायण धारावाहिक का प्रसारण.. देश में लागू... लॉक डाउन के दौरान हो रहा है...। अब सुबह और शाम प्रतिदिन हो रहा है...। इसके प्रसारण से पहला काम तो ये हुआ कि.... लोग उस चैनल की तरफ वापस लौट आए.... जो इन दिनों अछूत सा दर्जा पाया हुआ था... दूरदर्शन भारती....। दूसरा और महत्वपूर्ण काम यह भी होगा कि... आपसी प्रेम से दूर हुई पीढी को.... पारिवारिक प्रेम से रूबरू होने का मौका... परिवार के साथ ही मिलेगा....। त्याग और मर्यादा की परिभाषा को भी... रामायण गहरे तक जीवन में उतारती है...। इससे वंचित युवा पीढी... रामायण का संदेश पकड़ने में सफल हो... यह हम दुआ कर सकते हैं....। साथ ही पारिवारिक षड्यंत्र के धारावाहिक की इन दिनों विभिन्न चैनल पर बाढ़ सी आई हुई है...। परिवार के सदस्य का अपने ही परिवार के सदस्यों से भरोसा उठ गया है....। स्वयं को दूसरे से ऊँचा दिखाने के लिए, अपना वर्चस्व बनाने के लिए, अपना दबदबा साबित करने के लिए, संपत्ति या व्यापार पर आधिपत्य जमाने के लिए....कैसे कैसे आपसी षड्यंत्र उन धारावाहिको में आजकल दिखाये जा रहे हैं कि....उन्हे हमारी पीढी की तो देखने की भी इच्छा नहीं होती...।ऐसे धारावाहिक और बिग बॉस या इसी प्रकार के अन्य लाइव टीवी शो ने... जितना भी मानसिक संक्रमण फैलाया था... उसके लिए भी यह सीरियल... सेनेटाईजेशन का काम करेगा... यह आशा पूरी तरह व्यर्थ तो नहीं जाने वाली...। बुजर्गों का जो सम्मान .. रामायण के माध्यम से प्रसारित हो रहा है... और आज हमारे बुजुर्ग उस सम्मान के लिए... अपने ही घर में तरस रहे हैं...। उम्मीद की जाए रामायण का पुनः प्रसारण.. बुजुर्गों को उनका अधिकार दिलाने वाला भी साबित हो।
भाषा के लिए चिंतित रहने वालो के लिए भी यह धारावाहिक... खुश खबरी लाया है... बहुत से शब्दों के मतलब... युवा पीढी पूछ रही है... उसका हिंदी शब्द कोष... समृद्ध हो रहा है... राष्ट्र भाषा पर गौरव करने वालों के लिए... यह बात सीना फुला लेने जैसी है..। अभी हालांकि पाँच एपिसोड ही... प्रसारित हुए हैं.. बच्चे नकल में ही सही... माता, पिता, गुरुदेव..... प्रणाम या चरण वंदन.. जैसे शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं...। सबसे ध्यान देने वाला बिंदु यह है कि... जो समाचार पत्र, टीवी चैनल... हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के सवाल पर.... यह जवाब देते थे... कि हिंदी के कठिन शब्द लोगों की समझ नहीं आते... इसलिए हम... अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं....। वह सब भी गौर से देख लें... रामायण के संवाद सुनने के लिए... भारत भर का कोई भी दर्शक.... हिंदी से अंग्रेजी का शब्द कोष लेकर नहीं बैठता है...। वह हिंदी यानि विशुद्ध हिंदी के उन संवादों को... न केवल अच्छे से समझ रहा है... वरन कुछ शब्दों का प्रयोग भी करने की अवस्था पर... आने लगा है..।



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