लेखिका
अकड़ा सूखा है खड़ा , झुका सदा फलदार
कदर गुणों की जो करे , सही वही किरदार
छाया कितनी भी बड़ी , असली कद ले नाप
जीवन में हो सादगी ,छोड़ गुणों की छाप
सागर ओर चली नदी, जल बादल की ओर
गगन झुके कंपित धरा , भीगा आंचल छोर
प्रेम धागा करो रफू , प्रभु का दिया लिबास
काशी काबा कुछ नहीं , मानव गुण है खास
घुन बनकर ना चाट ले, तारीफों की खीर
आज जीभ लेती मज़ा,आगे होगी पीर
लज्जा आभूषण नयन , नारी की पहचान
धुरी बनी परिवार की , अधरों धर मुस्कान
मन से वो मजबूत है, तन से कोमल जान
जाने जीवन की कला, चाहे सबसे मान
-- ज्योत्सना सक्सेना
--------------परिचय
ज्योत्सना सक्सेना प्रधानाध्यापक रा.उ.मा.वि.सवना,भिंडर, उदयपुर,राजस्थान में हैं। जयपुर राजस्थान की निवासी हैं। आपके अंजुरी भर हरसिंगार,उमंगों के कचनार आदि काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ठुमकते गीत नाम से एक बाल गीत का संग्रह भी आ चुका है और एक उपन्यास "रेगमाही"जिसे फणीश्वर नाथ रेणु सम्मान प्राप्त हुआ। 7 साझा संकलन प्रकाशित हुए हैं। हिंदी बॉलीवुड फिल्म " मीराधा" के गीत साजना की गीतकार,जिसे जावेद अली ने आवाज़ दी है एवं सहकलाकार रही हैं।अंतरराष्ट्रीय "साहित्य सारंग सम्मान"जो 4 जून 2018 में इटली में मिला। साथ ही
"कला श्री" सम्मान मॉस्को में मिला है। आपकी एमपी मीडिया पॉइंट के लिए सहर्ष स्वीकृति पर आपका आभार एवं स्वागत है।
संपादक


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