इछावर तहसील के ब्रिजिशनगर मे भगोरिया हाट का जश्न,
दूर-दूर से मेलेे मे पहुंचे आदिवासी,
वाहन,बैलगाड़ी से तो पैदल चलकर आए आदिवासी,
पर्व के प्रति आदिवासियों मे जबरदस्त उत्साह

हुकुमसिंह मेवाड़ा/शिवराजसिंह राजपूत एमपी मीडिया पाइंट 


आदिवासियों के लोक एवं परिणय पर्व की आज शनिवार से इछावर तहसील मे शुरुआत हो गई।तहसील का पहला भगोरिया हाट ब्रिजिशनगर मे जारी भराया जहां ग्राम फांगिया,गुराड़ी,अलीपुर,नादान,मोयापानी,बावड़िया चोर,बलोंडिया,रामगड़,सोहनखेड़ा,कनेरिया,मंडलगड़,जामली,बालुपाट,मगरपाट,पांगरी,बोरदी खुर्द सहित करीब दो दर्जन आदिवासी गांवों के लोगों ने उत्साह से अपना पर्व मनाया।
मेले मे रंग-बिरंगे परिधानों मे आदिवासी युवक-युवतियां झूले-चकरी का आनंद लेते दिखाई दिए। वहीं बांसुरी की तान फाल्गुन मास का सुरों से जैसे स्वागत मे जुटी हो, ढोल-मादल की थाप पर थिरकते युवक-युवतियों की टोलियां मेले की खूबसूरती मे चार चांद लगा रही थी। 
शनिवार को डीजे की अगुवाई मे जुलूस निकाला गया जिसमे आदिवासी समाज प्रमुख साफा बांधकर निकले। ब्रिजिशनगर के नागरिकों ने सरपंच प्रतिनिधि ज्ञानसिंह राठौर के नेतृत्व मे पुष्प वर्षाकर जुलूस का स्वागत किया।

मेले मे परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण देखने को मिल। भगोरिया हाट मे परंपरागत आदिवासी वेशभूषा मे युवतियां पहुंची तो वहीं युवक आधुनिक जींस-टीशर्ट के परिधान मे दिखाई दिए।मेले मे आदिवासी गोदना प्रथा भी दिखाई दी।युवक-युवतियां अपने शारीरिक अंगों पर खुद के या अपने प्रेमीजन के नाम गुदवाती नजर आई तो इसबार भाग कर विवाह करने की पुरातनी प्रथा प्रायः विलुप्त रही।पान का बीड़ा गुलाबी होंठों से कुछ मन की बात अवश्य कहता नजर आया।

 महुआ की मंदिरा भी मेले मे मादकता घोले हुए रही। उम्र दराज लोगों पर भी मदिरा के साथ-साथ भगोरिया हाट का नशा छाया दिखाई देता रहा। जैसे-जैसे समय बड़ता गया वैसे-वैसे मेला शबाब पर आता जा रहा। प्रश‍ासनिक व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। समाचार लिखेजाने तक भगौरिया पर्व के जश्न का दौर जारी है।
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