शैलेश तिवारी 

लॉक डाउन... यानि विश्व के साथ भारतीय इतिहास की वह घटना... जिसने चलती फिरती, भागती दौड़ती.... जिंदगी की रफ्तार को थाम दिया....। कोरोना की वजह से जिंदगी....जलेबी की तरह उलझी लग रही है... अफसोस यह कि....जलेबी की तरह रस भरी नहीं रही.....। वही उलझी जिंदगी तई (एक प्रकार की कढ़ाही, जिसमें जलेबी को सेंका जाता है) में पड़ी है... नाना प्रकार की चिन्ताओं और आशंकाओं...की आग में सिक रही है....।....रस (चाशनी) की कढ़ाही तक पहुंचने की ख्वाहिश लिए हुए बहुत से लोगों ने... तरीके खोज लिए.... घर में बंद रहने के..। बहुत से लोग समय कैसे कटे.... इस पर चिंता जताते रहे..। तो कई घर में रहने को कैद मानकर डिप्रेशन में आ गए....। तो अधिकांश लोग घर में दो हफ्ते जैसे तैसे गुजार कर... 14 अप्रेल पर निगाह टिकाएं हुए हैं...। आशा की किरण उनकी आँखों में झिलमिला रही है.... बस एक हफ्ता और... इसके बाद.. तन्हाई से छुटकारा... फिर सड़कों पर चलने फिरने के अच्छे दिन आएंगे...। 
अच्छे दिन आने की.... कल्पना करना बुरा नहीं है...। आशावादी और सकारामकता सोच का परिचायक है..... लेकिन यथार्थ से मुँह मोड़ कर...बिल्कुल नहीं....। हकीकत यह है कि... प्रधानमंत्री मोदी... बतौर भाजपा नेता... जब अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हैं..... पार्टी के स्थापना दिवस पर.. उनसे आग्रह करते हैं... कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई लंबी है.....। 
केवल इसी बिंदु पर विचार करें तो.. यह वाक्य कोरोना के फैलाव की कहानी को भी बयाँ कर रहा है...। जो बीते पांच दिनों में दोगुनी संख्या तक जा पहुंचा है...। कोरोना से हुई मौतों का आंकडा भी... डराने वाला है..। 
इन सब के बीच... कोरोना से जंग लड़ रहे... वह योद्धा भी हैं... जो बिना सुरक्षा कवच (पीपीई) ..... बिना हथियार (बिना वेक्सीन) के... उस अदृश्य लेकिन ताकतवर दुश्मन के खिलाफ अपना... युद्ध कर्तव्य निभा रहे हैं..।टेस्टिंग किट की कमी से भी जूझ रहे हैं...।लेकिन लड़ाई जारी है.. .। इस युद्ध में वह आंतरिक सेना के सुरक्षा प्रहरी भी शामिल हैं... जिन्हें पुलिस के रूप में जानते हैं... वह भी जान की बाजी लगाए हुए हैं...। ...इनका जिक्र इसलिए कि... कोरोना का खतरा इन के सिर पर भी मंडरा रहा है...। और कोरोना पॉजिटिव की संख्या में... यह योद्धा शामिल भी हो रहे हैं...। इनको पॉजिटिव बनाने में... उन शक्तिमान का हाथ है... जो शासन, प्रशासन, पुलिस, सामाजिक संगठन आदि की... बार बार समझाइश के बाद भी... सड़कों पर वीरता प्रदर्शित करते रहे... कुछ अभी भी करने से बाज नहीं आ रहे हैं....। उनका कोरोना टेस्ट होना बाकी है...। कहाँ होंगे.. संख्या क्या होगी.. उनकी जिनमें संक्रमण की संभावना है...। उन्होंने और कितनों को यह कोरोना का उपहार बाँट दिया होगा...। शहरों से पलायन कर... अपने अपने गाँव पहुंचे लोगों के संक्रमित होने की आशंका.. अपना फन उठाए खड़ी है।
ऐसे ही बिंदुओं पर... सरकार के सर से पानी गुजर जाने को है.... कोरोना का देश में डेरा... दिमाग में चिन्ताओं की बहार है...। तब लगता नहीं कि.. आने वाली 14 अप्रेल हमारे लिए... खुली हवा में सांस लेने का पैग़ाम लेकर आने वाली है...। 
इस सिक्के के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो.. देश की अर्थ व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने की चुनोती सरकार के सामने है। घटी हुई आमदनी में ... बढे हुए खर्च की राशि को जुटाने की जिम्मेदारी भी उसके कंधो पर है। देश के अस्सी करोड़ उन नागरिको की कराह भी उसके कानों में गूँज रही होगी... जिनकी मजदूरी पर शनि की साढ़े साती लग जाने के हालात हैं....। उनके घरों में अब खाली कनस्तर भी अपना भोंपू बजा रहे हैं...। देखिये किस्मत का चक्कर.... देखिये कुदरत की मार.. रोटियों के वास्ते तरसते... कौन सुने उनकी पुकार...। किसान भी अपनी उपज को संभाल पाने की जुगत में है... मंडी खुले तो पैसा जेब में आए.. यह आस लगाए है। उद्योगपति हों या व्यापारी.... अथवा छोटे बड़े दुकानदार.... सबकी हालत पतली है...। 
सरकार को यह स्थिति भी समझ आ रही है.. अपने छः साल के राज काज में वर्तमान सरकार को पहली बार मीडिया घरानों से रूबरू होना पड़ा है..... विपक्षी दलों के नेताओं से टेलीफोनिक चर्चा की नौबत भी आई है... अब सर्व दलीय बैठक का आमंत्रण भी भेज दिया गया है...। टीएमसी ने बैठक का बहिष्कार यह कह कर  दिया है कि जब उसने संसद चलने के दौरान इस बैठक को रख कर कोरोना पर चर्चा करने का प्रस्ताव रखा था... तब सरकार ने क्यों नही उसकी बात सुनी...। अब समय गुजर जाने के बाद इस बैठक का क्या औचित्य है...। बहरहाल बैठक का उद्देश्य भी साफ है... मिलजुल कर निर्णय लिया जाए... की लॉक डाउन खोलें या बढ़ाये...? यह  स्थिति सांप और छछूंदर जैसी है... न निगलते बनती है.. न उगलते.... लेकिन सरकार और विपक्ष मिल जुल कर कोई बीच का रास्ता निकालते हैं... अथवा नागरिको से घर में और रहने की अपील की जाती है..। कोरोना से निपटने के लिए सामुदायिक दूरी बनाए रखने के राम बाण.. नुस्खे पर भी विचार करना लाजिमी है....। 
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