जो सप्तपदी चलकर... सात वचनों को निभाती आ रही.. उस नारी का सम्मान क्यों नही..? 

आधी आबादी को मिले.... पूरा सम्मान


माननीय प्रधानमंत्री जी ...

हम जानते हैं कि दुनिया के सभी देश कोरोना जैसी आपदा से जूझ रहे हैं ।भारत भी इससे अछूता नहीं है लेकिन एक बात का सुकून है कि आपने अपनी सूझबूझ से, सही समय पर लोगों को सावधान कर  ,इस महामारी के विरुद्ध लड़ने के लिए उचित कदम उठाए हैं। सोशल डिस्टेंसिङ्ग ,लॉक डाउन करना ,संक्रमित प्रदेशों और जिलों को हॉटस्पॉट करार देने जैसे कदम देश और जनता हित में क्रियावन्तित करने में ज़रा भी देर नहीं की।हम सब जानते हैं कि इस में ही हम सब की ,देश की भलाई है।

प्रधानमंत्री जी , एक बात बहुत अच्छी लगी कि कोरोना के खिलाफ इस मुहिम में आपने डॉक्टर ,नर्स,पुलिस ,सफाई कर्मचारी आदि अनेक सेवा में लगे लोगों की हौसलाफ़ज़ाई और सम्मान देने और उनका धन्यवाद करने हेतु थाली ,ताली या शँख आदि बजाने और दूसरे चरण में दीपक जलाने के लिए जनता को प्रेरित किया ।सबने आपके इन प्रयासों को सर माथे रख उनका पालन किया और बड़े उत्साह के साथ असंख्य दीपकों की लौ में न केवल सेवा पथ पर अड़िग लोगों का धन्यवाद किया बल्कि तन मन से लॉक डाउन जैसे कदम को अपनाकर कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए संकल्प कर योगदान दिया है और दे रहे हैं।सच मानिए प्रधानमंत्री जी ,हम सब दिल से आपके साथ जुड़े हैं और आपकी हर क्रिया की प्रतिक्रिया में एक जुट होकर आपके अगले कदम ,आपके अगले सम्बोधन का इंतज़ार करते हैं।

 14 अप्रैल को,पहले लॉक डाउन की अवधि समाप्त होने पर हमने आपके सम्बोधन को  ,सात वचनों 'सप्तपदी' को फिर से सुना। लगा कि आप फिर कोई टास्क, नियम या प्रेरित करते हुए किसी कार्य के लिए सबसे कहेंगे । लेकिन बढ़ते खतरे को देखते हुए  आपने लॉक डाउन की अवधि बढ़ाने का ही ऐलान किया।पर प्रधानमंत्री जी ,एक कमी हमें ज़रूर अखरी ।वह यह कि देश में कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में जिस साहस के साथ जनता ने सहयोग दिया है न उसे सफल बनाने में एक अहम श्रेय महिलाओं को जाता है।।कारण कि लॉक डाउन में घर में बैठे पति ,भाई, बेटे और पिता सब पुरुष आज जिस खामोशी से घर बैठे हैं न ,उसके पीछे महिलाओं की क्रियाशीलता ही है। घर के सम्पूर्ण कार्यों की ज़िम्मेदारी निभाते हुए,पूरे परिवार की फरमाइशों और ज़रूरतों का ध्यान हर घर की महिला एक पाँव पर ही  खड़ी होकर रख रही है।हम जानते हैं कि पुरुष वर्ग कुछ हद तक सहयोग कर भी रहा है पर उन पुरुषों को काम के लिए उत्साहित करना भी तो महिला पर निर्भर करता है वर्ना पुरूष  घर के कार्यों में रुचि कहाँ लेते हैं ? घर का एक पुरूष यदि एक काम करता है तो घर की महिला उसके चार काम सँवारती है तब जाकर यह सम्भव होता है।आजकल तो हर नारी पाकशास्त्री ,सफाई कर्ता ,धोबी ,नाई सब के रोल निभा रही है ताकि पति या बच्चों को  घर से बाहर न जाना पड़े ।सुबह से लेकर रात तक बिना उफ़ किये वह अपना काम ततपरता से निभाती जा रही है पर बदले में उसे तारीफ के दो बोल तक नहीं मिल रहे।

आप कहेंगे कि यह तो हमारा फ़र्ज़ है।मानती हूँ ,और हर महिला अपने फ़र्ज़ बखूबी निभा रही है ।पर हमने आपसे ही तो सीखा है कि जो लोग सेवा कर रहे हैं कोरोना के खिलाफ इस मुहिम में उनकी हौसलाअफ़ज़ाई की जाए।कभी ताली बजाकर कभी थाली बजाकर ! इस मुहिम के सिपाहियों का धन्यवाद करने हेतू ताकि सेवा कर्मियों का उत्साहवर्धन हो ? तो क्या हम महिलाएँ सेवा नही कर रहीं ? क्या हम अपने परिवार का ध्यान पहले से अधिक नहीं रख रहीं ताकि लॉक डाउन का पालन अच्छे से हो ? इतना ही नहीं ,कोरोना के कारण व्यापार को लेकर चिंतित हमारे पति ,भाई और पिता के लिए मानसिक सम्बल बनने का प्रयास भी हम महिलाएँ कर रही हैं और निकट भविष्य में इस आपदा से उपजी आर्थिक मंदी में उनका साथ देने का वचन भी निभा रहे हैं ताकि वे कमाई की चिंता में घर से बाहर जाने की ज़िद और जल्दबाज़ी न करें।प्रधानमंत्री जी ,हम अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए उन्हें आश्वासन दे रहे हैं कि दुख और कष्ट की ये घड़ियाँ भी मिट जाएँगी ।हम उन्हें आपके प्रयासों से समय समय पर वाकिफ़ करवाते हैं कि आप जो कर रहे हैं उससे देश और जनता का भला ही होगा।

इतना सब करते हुए भी बस एक ही कमी खल रही है कि हमारी हौसलाअफ़ज़ाई  कोई नहीं कर रहा ।हमें कोई धन्यवाद नही कर रहा या न ही कोई हमारे बढ़ते कार्यों को समझ रहा है। हम महिलाएँ देश का हिस्सा हैं ,हम भी अपने घर परिवार के लिए मुस्तेदी से जुटे सिपाही ही तो हैं जो खुद आधी नींद आधे जागकर भी परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में जुटे हुए हैं।कहते हैं कि घर के बड़े अगर कोई साकारत्मक कार्य करें तो घर के बाकी सदस्य भी उनकी दिखाई राह पर चलते हैं।तो आप भी तो इस देश के बड़े हैं ,अगर आप हम महिलाओं की हौसलाअफ़ज़ाई करेंगे तो बाकी जनता भी हमारी कद्र करेगी ,सराहना करेगी। धन्यवाद कोई करे न करे प्रधानमंत्री जी पर हमारे प्रयासों को ,हमारे कार्यों का एहसास तो हो सबको .. बस यही हर नारी चाहती है।हम धन्यवाद स्वरूप कोई उपहार नहीं चाहते बल्कि हम स्नेह से जुड़ा एक एहसास चाहते हैं हमारे अपनों द्वारा ,परिवार द्वारा।यदि हम अपने देश को अपना परिवार समझते हैं हमारी भावनाओं को  देश का हर पुरुष भी तो कोई समझे।

एक एलान हमारे लिए भी करवा दीजिये आपके अगले किसी सम्बोधन में कि हम महिलाऐं भी परिवार की सिपाही हैं।हम हैं तो परिवार है ,परिवार है समाज है और समाज है तो देश है।

प्रधानमन्त्री जी ,हमने तो अपने दिल की बात कही है।वैसे देखा जाए तो यह हर नारी के दिल की आवाज़ है जो लॉक डाउन में अपनी इच्छाओं ,अपनी ज़रूरतों का लॉक डाउन कर परिवार को हर संकट से मुक्त करने के लिए सदैव से जुटी रही है।फिर यह कोरोना क्या है ?इसे तो जाना ही होगा हमारे देश से ,शहर और हमारे घरों से।प्रधानमन्त्री जी ,कहते हैं कि किसी भी लड़ाई की शुरुआत घर से ही होती है।इसलिए कोरोना के ख़िलाफ़ हमारी मुहिम घर से शुरू हो चुकी है।

साकारत्मक रुख अपनाते हुए भारत की हर नारी आपके साथ है।।जय हिंद !!

नारी हित मे ज़ारी ...

एक भारतीय नारी !!

- रश्मि तारिका, सूरत, गुजरात

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परिचय 


रश्मि तारिका मूलतः पंजाब का प्रतिनिधित्व करती हैं। आजकल गुजरात के सूरत शहर में रहकर साहित्य से जुड़ी रहती हैं। कहानी संग्रह कॉफी कैफे प्रकाशित हो चुका हैं आजकल एक बायोग्राफी पर  काम कर रही हैं। समाज के सम सामयिक मुद्दों पर आपकी लेखनी बेहतर चलती रहती है। उन्होंने एमपी मीडिया पॉइंट के लिए अपनी कहानी "वो दूसरा पत्र" प्रेषित की है। 
आपका स्वागत और आभार... 
संपादक
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