लेखक 

मौन की अभिव्यक्ति


एक रिश्ता है,
तुम्हारे सर्द लहजे 
और मेरी सुर्ख आंखों के
बीच

एक पति है,
जिसके उठते हर तमाचे में
मैंने अपनी ही गलती खोज
ली,
उसने जब चाहा निचोड़ा
मेरा बदन
और,मेरे इनकार में 
सहमति खोज ली

एक समाज है,
जिसने देवी का दर्जा 
देके,
मेरे साथ हर राक्षसी कृत्य
किया,
जिसने बुतों को पूजा
और, जीवित को सती
किया

एक माँ है,
जिसने सारे दुःख सहे
और विरसे में मुझे
लहू से सुर्ख़
और, अश्रु से नम
दामन सौंपा

वो है मुतमईन और चाहती है
मैं भी हो जाऊं,
कि, ये तो कर्त्तव्य है स्त्री का

एक बेटी है,
जो है मेरी उम्मीद
मैं नहीं चाहती उसे सौंपना
विरसे में मिला दामन

एक दर्द है,
जो अब नहीं होता दूर,
मेरे छिदे कान
और, दूब पे पड़ी ये ओंस की बूंद

एक पितृसत्ता है,
जिसने छेदे मेरे कान
और पायलों में पिरोकर
बंदिशें मेरे पैरों में डाल दीं।

पायलों की रुनझुन के संग
अब मेरा दर्द छनछनाता है।

--मनीष कुमार यादव, इलाहाबाद (उत्तरप्रदेश)

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परिचय 

मनीष कुमार यादव इलाहबाद (प्रयागराज)उत्तर प्रदेश के निवासी हैं।  कक्षा 12वीं के विद्यार्थी हैं और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। छोटी उम्र में साहित्य की बड़ी सेवा कर रहे हैं। 
इन्होंने एक किताब भी लिखी है   
 "The True Story Of India" जो प्रकाशनार्थ है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है। 
संपादक
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