लेखक 

कोरोना तेरो नाश जायेगो ,
तोकू ठौर मिलैगौना |
तैने बृजवासिन सै छीन लियौ है ,
जलेबी कचौड़ी कौ दौना ||

घर मैं बैठै तरस रहै हैं लड्डू ,रबड़ी, छैनांकू |
पान मसालों रीत गयों है, 
मिलै कहीं ना तंबाकू ||

अँखियाँ कब से तरस रहीं हैं 
ठाकुर जी के दर्शन कू |
यमुना मईया याद करै हैं,
अपने भोले भक्तन कू ||

तौकू शरम नैक ना आवै ,
बालक बैठै पढ़वे ते |
तोए कहा आराम मिलै है ,
सास बहू के लड़वे ते ||

मारग सूने, पनघन सूनी ,
सूने कुंजन गलियारे |
बृजवासिन कौ श्राप है तौकू ,
जन जन के ओ हतियारे ||

बृजवासिन की बाट तकै है, भूखे, बंदर, पंछी गईया |
व्याकुल हैके राह तकै हैं 
वृक्षन की शीतल छईया |

मरी पूतना, कंस बचयौ ना, कान्हा के प्रहार ते |
तू तो पल मैं मिट जायैगो ,
बृजवासिन की इक ललकार ते |

रामशरण दुबे,  वाराणसी 


----------------------

परिचय

राम शरण दुबे  वाराणसी के निवासी हैं। वर्तमान में नोएडा में निवास कर रहे हैं। 
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय आचार्य और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत कला संकाय मे तबला से डिप्लोमा धारी है। डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में जॉब करने के साथ साहित्य के सेवा भी समय निकाल का करते हैं। एमपी मीडिया पॉइंट में आपका स्वागत है। 
संपादक
Share To:

Post A Comment: