सुर्खियों मे डीएफओ का दौरा...
दिनेश शर्मा,आष्टाएमपी मीडिया पाइंट
डीएफओ सीहोर, रमेश गनावा का आष्टा दौरा विरोधाभासी बयानों से लग रहा शंकास्पद,बीते दिवस वन विभाग के जिला अधिकारी ने आष्टा अनुविभाग के सिद्धिगंज वन परीक्षेत्र का विभागीय दौरा कर जायजा लिया। रेंजर सुभाष शर्मा द्वारा दूरभाष पर दिए बयान इस विभागीय दौरे की पुष्टि भी कर रहे है।
किन्तु डीएफओ साहब से जब इस दौरे के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने अपने विभागीय दौरे का मकसद ही बदल दिया, और इस दौरे को कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए वन ग्रामों के लिए जागरूकता वाला दौरा बता दिया ,अब यहाँ प्रश्न खड़ा हो रहा है कि वन विभाग के जिला अधिकारी को अपने दौरे का स्वरूप क्यों बदलना पड़ा ,इसके पीछे कौन कौन से कारण है। जिन्होंने साहब को मजबूर कर दिया। फील्ड की चर्चाएं विपरीत बयां कर रही हैं। आधिनस्थ कर्मचारी भी हकीकत के मौन रहकर उगलते नजर आ रहे हैं।
वैसे भी वनविभाग के अधिकारी आसानी से अनुविभागों का दौरा नहीं करते है क्योंकि अगर इतने सजग होते तो शायद बेशकीमती सागौन के जंगलो की आसानी से अंधाधुंध कटाई नहीं होती । और शहर सहित अनेकों गांवों की आरामशीन और फर्नीचर की दुकानें दिन दोगुनी ओर रात चार गुनी न फलती फूलती!! वैसे भी वन विभाग शहर में फर्जी तरीके से मृतकों के नाम से चलने वाली आरा मशीनों वाले मामले में पिछले दिनों बहुत सुर्खियों में रहा है। बीते दिवस जिले के साहब चुपचाप अनुविभाग के जंगलवाले एरियो का दौरा करने चले गए ,जिसकी वास्तविकता अनुविभाग के रेंजर ने भावावेश में दूरभाष पर उजागर कर दी।
किन्तु जिले के अधिकारी का इस तरह से ॥अपने दौरे का उद्देश्य बदल कर बताना अपने कई उद्देश्यों को स्वत: ही उजागर कर गया । क्योंकि इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि इस दौरे की जानकारी मीडिया को भी नहीं दी गई।
लेकिन इस पूरे मामले में साहब द्वारा अपने दौरे को कोरोना जागरूकता से जोड़कर बताना भी अनेकों सवालो को जन्म दे रहा है। खेर लॉकडाउन के चलते साहब को विभागीय दौरा किसलिए आवश्यक रूप से करना पड़ा।यह भी आज नहीं तो कल उजागर हो ही जायेगा ।बस समय का इंतजार करो। आष्टा अनुविभाग मे आए किसलिए थे और बताया क्या__यह बात फिलहाल चर्चा का विषय बनी हुई है।

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