भोपाल,  एमपी मीडिया पाइंट

भोपाल मे पदस्थ सीएमएचओ डा सुधीर डहेरिया का स्थानांतरण सीहोर हो गया है। बतादें यह वही करिश्माई डाक्टर साहब हैं जो कोरोना से जंग लड़ने के कारण 5 दिन बाद घर पहुंचे थे और बाहर से ही बच्चों से हलो-हाय कर वापस कर्तव्य पर लौट आए थे। उस दौरान पत्नी के हाथ की एक चाय भर पी। अब डा. डहरिया को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृहजिला सीहोर की कमान सौंपी गई है ।
तस्वीरें अक्सर खुद ब खुद एक कहानी होती है। वो अपने आप में पूर्ण होती है। तस्वीर आपके जज्बातों को बयां करती है। कभी-कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा कि किसी तस्वीर को देखते-देकते आपकी आंखों से आंसू टपकने लगे हों। और बहुत मुमकिन भी है कि उस तस्वीर से आपका कोई वास्ता न हो। इस वक्त हमारे खूबसूरत मुल्क पर एक आपदा आ गई है। चारों तरफ माहौल गमज़दा है, सड़कें शांत हैं, जानवर भी बेचैन हैं...हम उस मनहूस आपदा का जिक्र भी नहीं करना चाहते। लेकिन एक तस्वीर 135 करोड़ देशवासियों से कह रही है कि आप फिक्र न करें हम हैं न...
पांच दिनों बाद पांच मिनट की मुलाकात
इस मुश्किल दौर में डॉक्टर्स फरिश्ता बनकर आए हैं और ये उतनी ही लगन से मुल्क की सेवा कर रहे हैं जैसे सरहद में खड़ा एक जवान। एक डॉक्टर पांच दिनों के बाद घर आता है। घर में उसकी पत्नी और दो बच्चे कब से उसका इंतजार कर रहे होते हैं। छोटा बेटा मां से बार-बार जिद करता है कि पापा को बुलाओ-पाप को बुलाओ। पहले तो हर रोज वो समय से घर आ जाते थे और मेरे साथ खूब वक्त बिताते थे लेकिन अब मां ऐसा क्या हो गया कि पापा घर नहीं आ पा रहे हैं। तभी उसके पापा पांच दिनों के बाद घर आते हैं लेकिन वो दहलीज के बाहर ही बैठ जाते हैं। एक मासूम बच्चा जब इतने दिनों के बाद अपने पिता को देखता है तो वो भागकर पिता की गोद पर जाना चाहता है लेकिन वो बच्चा जैसे ही पिता के पास जाता है मां उसकी कलाइयों को कसकर पकड़ लेती है और कहती है कि बेटा पापा को मत छुओ।

पत्नी का साहस देख डॉक्टर की थकान छू-मंतर
वे दूर से ही बेटे को पुकारते हैं और कहते हैं कि बेटा परेशान मत हो पापा जल्दी से घर लौट आएंगे और फिर आपके साथ खूब मस्ती भी करेंगे। इस दौरान उसकी पत्नी एक निर्भीक महिला का किरदार अदा कर रही है। पत्नी अपने जज्बातों पर पूरी तरह से काबू किए हुए हैं। उसके आंसू बार-बार पलकों तक आते हैं लेकिन वो रो नहीं पाती। क्योंकि उनको पता है कि सामने बैठा शख्स मौत को मात देने का काम कर रहा है। हर पल वो जिस बीमारी के साए में रहते हैं उस बीमारी ने पूरी दुनिया की जड़ें हिलाकर रख दी हैं। बड़े से बड़ा मुल्क इस बीमारी के आगे महज लाशों के ढेर गिनता जा रहा है। अगर पत्नी के आंसू उस वक्त गिर जाते तो शायद डॉक्टर अंदर से टूट जाता या फिर जब डॉक्टर अपने काम पर लौटता तो उसको अपनी पत्नी आंसू दिखते और वो दिल लगाकर काम नहीं कर पाते। उनका बड़ा बेटा सब समझ रहा है। उसको फक्र है कि उसके पिता आज लोगों की जान बचा रहे हैं। वो प्यारी सी मुस्कराहट के साथ पापा से गुफ्तगू करता है।
साभार
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