ग्यारह हजार क्विंटल गेंहू अब भगवान भरोसे,
तुलाई के बाद भाऊँखेड़ी केंद्र पर बिखरा पड़ा है "अन्नों का राजा",
समस्या यह कि कहां रखें!!
आसपास पर बारिश के बादल,
इधर आसमान तले गेहूं पर संकट के बादल
राजेश बनासिया,भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
इछावर ब्लाक के गांव भाऊँखेड़ी में पिछले माह 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य आरंभ हो गया था। शुरुआत में कम किसानों को एसएमएस भेजे गए, तत्पश्चात मई माह में एसएमएस की तादाद बड़ा देने से खरीदी केन्दों पर लंबी-लंबी लाइनें लगने लगी।
इछावर तहसील के भाऊँखेड़ी में जहाँ वंशिका वेयरहाउस में तुलाई व भंडारण का कार्य लगभग एक माह चलने के बाद वेयरहाउस फुल हो गया। लेकिन किसानों की तादाद में कमी नही आई,साथ ही नजदीकी ग्राम आमाझिर "हल्के" का गेंहू जब भाऊँखेड़ी में तुलवाने के आदेश प्राप्त हुए तो खरीदी केंद्र के कर्मचारियों के होश उड़ गए क्योकि भंडारण की जगह ही नहीं थी।
प्रशासन ने गेहूँ परिवहन की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जिसके कारण आज भाऊँखेड़ी सोसायटी में ग्यारह हजार क्विंटल "अन्नों का राजा" कहा जाने वाला गेंहू खुले आसमान तले पड़ा है जहाँ सोसायटी के सभी कर्मचारी रात दिन लगे है।
मानसून दस्तक देने वाला है ऐसे मे गेहूं को भीगने से बचाना उनके लिए बढ़ी चुनौती बना हुआ है।
देखा जाए तो इस समय प्रदेश में कई जगह मौसम भी खराब चल रहा है इस डर से आज भाऊँखेड़ी सोसायटी में बतौर वैकल्पिक व्यवस्था के जेसीबी मशीन से गेहूं को इकठ्ठा किया गया व उस पर तिरपाल ढाँकनें की तैयारी की गई ताकि बारिश से गेहूं को बचाया जा सके। भाऊँखेड़ी सोसायटी के कर्मचारियों ने बताया कि हमारे द्वारा गेहूं को सुरक्षित रखने के हरसम्भव प्रयास किये जा रहे हैं पर प्रशासन को भी चाहिए कि गेहूं परिवहन की व्यवस्था जल्द की जाए ताकि खुले आसमान तले पड़ा हजारों क्विंटल गेंहू बेकार होने से बच सके।
बतादें कि यदि प्री मानसून ने दस्तक दे दी तो 11000 क्विंटल गेहूँ को बचाना टेडी खीर साबित हो सकता है क्योंकि तेज हवाओं के साथ ही अक्सर मानसून अपनी आमद दर्ज कराता आया है ऐसे मे सब वैकल्पिक प्रयास विफल साबित हो जाते हैं। लोगों का तो यहातक कहना है कि भिगोकर सड़ाने से तो बेहतर होगा कि लाकडाउन के मौके पर जरुरतमंदों को समय रहते गेहूं वितरित कर दिया जाए। लेकिन ...ऐसा नहीं होगा यह भी ग्रामीण जानते हैं।
तुलाई के बाद भाऊँखेड़ी केंद्र पर बिखरा पड़ा है "अन्नों का राजा",
समस्या यह कि कहां रखें!!
आसपास पर बारिश के बादल,
इधर आसमान तले गेहूं पर संकट के बादल
राजेश बनासिया,भाऊँखेड़ी
एमपी मीडिया पाइंट
इछावर ब्लाक के गांव भाऊँखेड़ी में पिछले माह 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का कार्य आरंभ हो गया था। शुरुआत में कम किसानों को एसएमएस भेजे गए, तत्पश्चात मई माह में एसएमएस की तादाद बड़ा देने से खरीदी केन्दों पर लंबी-लंबी लाइनें लगने लगी।
इछावर तहसील के भाऊँखेड़ी में जहाँ वंशिका वेयरहाउस में तुलाई व भंडारण का कार्य लगभग एक माह चलने के बाद वेयरहाउस फुल हो गया। लेकिन किसानों की तादाद में कमी नही आई,साथ ही नजदीकी ग्राम आमाझिर "हल्के" का गेंहू जब भाऊँखेड़ी में तुलवाने के आदेश प्राप्त हुए तो खरीदी केंद्र के कर्मचारियों के होश उड़ गए क्योकि भंडारण की जगह ही नहीं थी।
प्रशासन ने गेहूँ परिवहन की भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जिसके कारण आज भाऊँखेड़ी सोसायटी में ग्यारह हजार क्विंटल "अन्नों का राजा" कहा जाने वाला गेंहू खुले आसमान तले पड़ा है जहाँ सोसायटी के सभी कर्मचारी रात दिन लगे है।
मानसून दस्तक देने वाला है ऐसे मे गेहूं को भीगने से बचाना उनके लिए बढ़ी चुनौती बना हुआ है।
बतादें कि यदि प्री मानसून ने दस्तक दे दी तो 11000 क्विंटल गेहूँ को बचाना टेडी खीर साबित हो सकता है क्योंकि तेज हवाओं के साथ ही अक्सर मानसून अपनी आमद दर्ज कराता आया है ऐसे मे सब वैकल्पिक प्रयास विफल साबित हो जाते हैं। लोगों का तो यहातक कहना है कि भिगोकर सड़ाने से तो बेहतर होगा कि लाकडाउन के मौके पर जरुरतमंदों को समय रहते गेहूं वितरित कर दिया जाए। लेकिन ...ऐसा नहीं होगा यह भी ग्रामीण जानते हैं।



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