संपादकीय
सुनो सरकार... कर्मवीरों की पुकार...
श्रम.... शारीरिक... मानसिक... और आत्मिक तीनों तरह का है...। श्रम की कोख से ही.. जन्म लेता है कर्म...। श्रम से पाए जाते हैं... पुरुषार्थ... और पारिश्रमिक भी....। आज किसी भी तरह के श्रम की कद्र सरकार तो नहीं ही कर रही है।
वैश्विक महामारी के दौर में.... वह मंजर भी आँखो से रोज देखा जाता रहा.... जब न हाथ में निवाले थे... लेकिन पाँव में छाले थे... हाँ ये मजदूर घर लौटने वाले थे....। एक महीने तक ये... महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों के साथ.. रोजी से हाथ धोकर.... गाँव की रूखी सूखी रोटी की चाह में.... महानगरों से अपने घर की तरफ... अनेकानेक परेशानियों से रूबरू होते हुए... घर लौटते रहे...। टूटे हुए... बारिश में टपकते छप्पर में पीढियां गुजार देने वाले इन मजदूरों ने......आकाश छूती इमारतें खड़ी कर विकास की इबारत लिखी.....। बदले में इन्हें नहीं दिया इनाम.....बल्कि काट लिए गए....इनके खून पसीने के दाम....। इन्हें इस्तेमाल किया गया... शतरंज की गोटियों की तरह..... प्यादे जो ठहरे......। लेकिन सुनिये हुजूर ये मुल्क के वो मालिक हैं.... जिनके वोट से सरकार बनती और बिगड़ती हैं...। .लेकिन संकट की घडी में इनकी सुध किसी ने नहीं ली...। एक महीने बाद होश में आई.... सरकारे... बसे लगाई गई तब.... जब कई ने अपने प्राण गँवा दिए... घर पहुंचने की जद्दो जेहद में...। रोजी तो गई... अब घर पहुँच कर रोटी भी मिल पाएगी या नहीं... सवाल ये भी बड़ा है?
मेडिकल स्टाफ् की बात भी कर लें... जो आज भी कोरोना से निपटने के लिए... बिना पी पी ई किट के मैदान में डंटे हैं....। इनके पास एन 95 किस्म का मास्क भी नहीं है...। घर बनाए मास्क का इस्तेमाल किया जा रहा है..। और दूसरी चीजें भी नहीं हैं... इनके पास...। ये कहना है देश की राजधानी के.. जी बी अस्पताल के डॉ और मेडिकल स्टाफ् का...। नतीजा ये भी संक्रमित खासी तादात में हो रहे हैं...। पुलिस कर्मी भी कोरोना के चपेट में आने वालों में मध्य प्रदेश में... अच्छी खासी संख्या में हैं....। कारण वही... सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम का नहीं होना....।
आज के माहौल में... यही कर्मवीर हैं.... जो पुकार लगाएं भी तो कैसे..? सरकार सवा महीने का वक्त गुजर जाने के बाद भी इंतजाम कहाँ कर पाई....। सवा महीने में सूतक भी उठ जाती है... लेकिन भ्रष्ट रूपी चुड़ैल का दांव सूतक में ही लगा... जो ढाई सौ का टेस्टिंग किट छः सौ में खरीद गई...। वो भी स्तरहीन....। आईसी एम आर को कहना पड़ा... इनका इस्तेमाल नहीं किया जाए...।
सरकार... सुन लो... कर्मवीरों की पुकार...।


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