कोरोना का केवल हल्ला मचा रही सरकार, मरीजों की नहीं हो रही देखभाल..
नई दिल्ली, एमपी मीडिया पॉइंटदेश की राजधानी दिल्ली में जब कोरोना के मरीजों को लेकर ऐसी स्थिति है, जो आम आदमी को डराने वाली ज्यादा है। तब देश के बाकी हिस्सों का क्या हाल होगा। हेल्प लाइन का नंबर हो या फिर कोई और सरकारी नंबर, अव्वल तो फोन उठता नहीं, अगर उठा लिया है तो मरीज या उसके परिजन को टाला कैसे जाए, ये खेल खेला जाता है। खुद को खुद की जिम्मेदारी लेने का वक्त है और सरकारों से सवाल पूछे जाने का भी। लॉक डाउन बेहतर विकल्प है लेकिन कब तक..? बाकी तैयारी तो सरकार के ही जिम्मे है जो उस को अभी तक कर लेनी चाहिए थी लेकिन अफसोस...। तैयारी के नाम पर ढिंढोरा पीटा जा रहा है। खुद जानिए इन वीडियो से हकीकत...।
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सरकारी टेस्टिंग कैसी हो रही है या फिर कहा जाए जिन घरों में कोई कोरोना पॉजिटिव मिल रहा है वहां उस घर के सभी मेंबर्स का टेस्ट होना चाहिए परंतु ऐसा कुछ नहीं हो रहा। अभी कल आदर्श नगर रोड पर जिस फ्लैट में डेथ हुई अब तक सरकार की तरफ से उनके टेस्ट नहीं हुए जबकि होना ये चाहिए था पूरी फैमिली का साथ साथ टेस्ट होता। आज पांचवां दिन है जब से सरकार की जानकारी में ये केस आया। अब सुना है वो लोग प्राइवेट टेस्ट करवाएंगे लेकिन प्रश्न उठता है ये कैसी व्यवस्था है?क्या सिर्फ घर के आगे लाल पोस्टर लगा देने भर से उनकी ड्यूटी पूरी हो गयी?
अब कल डेथ हुई तो उनकी फैमिली के सब लोग ऊपर नीचे आ जा रहे थे तो कम से कम उनका घर, जीने, रेलिंग आदि सैनिटाईज़ नहीँ होनी चाहिए?
बस दो बार बाहर से पूरी रोड के घर सैनिटाइज हुए। क्या इतना काफी है जबकि वो 4th फ्लोर पर रहते हैं और उनके फ्लोर तक तो फुहार भी नहीं जा रही थी।
यदि इसी तरह की लापरवाहियां बरती गयीं तो दिल्ली का क्या होगा, कहा नहीं जा सकता।
एक केअर टेकर बता रही थी वो जहाँ रहती है उससे पहले कुछ घर बने हुए हैं चार पांच मंज़िलें, पैसे वाले लोग हैं। वहां एक लेडी को कोरोना का हल्का असर था उसे ले गए। उसका पति जहां उसे ले गए वहां जाकर मोबाइल दे आया। अब पता चला कई दिन हो गये उसे कोई दवाई नहीं दी गयी। वो खूब रो रही थी। उसके पति ने जाकर कहा पांच मंज़िल घर है ऊपर की दो खाली हैं यदि ऐसे ही अलग रखना है तो हम वहीं रख लेते हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं।
एक केस और। एक डिस्पेंसरी में एक जानकार काम करता था। वहां काफी लोग पोसिटिव थे तो उसने अपना भी टेस्ट करवा लिया और टेस्ट पोसिटिव आया तो घर मे क्वारंटीन हो गया मगर उसे कोई लक्षण नहीं थे तो उसे डाउट हुआ और उसने लाल पैथ से टेस्ट करवाया तो नेगेटिव आया। फिर भी उसे लगा गड़बड़ न हो फिर लाल से करवाया तो वो भी नेगेटिव आया।
ये सब केस देखकर अंदाज़ लगाया जा सकता है क्या दिखाया जा रहा है मीडिया के माध्यम से और हो क्या रहा है।
ऐसे में सिवाय अपनी सुरक्षा और जागरूकता के कोई और उपाय नहीं दिख रहा।


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