लेखिका
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मिश्रित एहसासों से
विभोर भाव आज कुछ
आल्हादित से हैं
ये लम्हें यादगार
बन जाएं काश
ठहर जाए ये वक्त यहीं
उथली पगडंडियों पे
जब थकते कदमों को
मरहम सी छांव मिलती है
तो तपते गमों को
हराना आसान सा
हो जाता है,
रूक जाओ ,ठहर जाओ
की एक आस में पलते
ख़्वाब बेआस हो
बिख़र न जाएं कहीं
.....निधि भार्गव मानवी
गीता कालोनी ईस्ट दिल्ली
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आपके चार साझा काव्य संकलन और एकल काव्य संग्रह - अनकहे जज़्बात नाम से प्रकाशित हो चुका है। दो पुस्तकें शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। कई टीवी चैनल पर आप काव्य पाठ भी कर चुकी हैं। आपको विभिन्न मंचों से पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक
वक्त ठहर जाए काश__
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मिश्रित एहसासों से
विभोर भाव आज कुछ
आल्हादित से हैं
ये लम्हें यादगार
बन जाएं काश
ठहर जाए ये वक्त यहीं
उथली पगडंडियों पे
जब थकते कदमों को
मरहम सी छांव मिलती है
तो तपते गमों को
हराना आसान सा
हो जाता है,
रूक जाओ ,ठहर जाओ
की एक आस में पलते
ख़्वाब बेआस हो
बिख़र न जाएं कहीं
.....निधि भार्गव मानवी
गीता कालोनी ईस्ट दिल्ली
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परिचय
निधि भार्गव मानवी गीता कालोनी, दिल्ली की निवासी हैं। गृहणी होने के साथ साथ साहित्य के सेवा करती रहती हैं।आपके चार साझा काव्य संकलन और एकल काव्य संग्रह - अनकहे जज़्बात नाम से प्रकाशित हो चुका है। दो पुस्तकें शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में भी निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। कई टीवी चैनल पर आप काव्य पाठ भी कर चुकी हैं। आपको विभिन्न मंचों से पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
संपादक


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