लेखिका


 आओ आशाओं में यकीन करें----------


कभी यकायक घिर आये जिंदगी में शाम जब 
              थम जाये होड़ और उमंग भी---ऐसे ही लम्हों मे 
जिंदगी को जगाती है आशाये------
             सिखाती है मंत्र------
दिखाती है जिंदगी के नये रास्ते-----------
हम हारते तो है ,पर फिर भी जीतने की चाह जगाती है आशाये ही तो है जिंदगी की जद्दोजहद--जिंदगी को पुनः जी लेने की कोशिश ,ईश्वर का शुक्रिया अदा करने की नई कोशिश है आशा ,नाउम्मीदियों के अंधेरो से निकाल लाती है आशाये, ---- कभी-कभी आश्चर्य होता है कि वो कौनसी शाक्ति हैं जो टूटकर भी टूटने नहीं देती 
शायद आशायें,जहां कल्पनाओं की ऊंची उड़ान है----
जब-जब जागती है आशाये----तब तब बढ़ाता है सृजक अपने कदम और तब तब उतरता है स्वर्ग धरती पर --------

                     मंजु श्रीवास्तव

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 परिचय

    मंजु श्रीवास्तव  छिंदवाड़ा मप्र में निवास करती हैं। साहित्य से लगाव रहा है। आलेख कविता और कहानियां आदि विधाओं से आप साहित्य सेवा करती रही हैं। आपकी रचनाएँ विभिन्न समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। एमपी मीडिया पांईट पर आपका स्वागत हैं। 
संपादक
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