लेखिका 


****यादों का झरोखा***


आज हमने अपनी यादों का झरोखा खोला तो यादों की किताब के पन्ने फड़फड़ाए और ले गये बीस बरस पहले  जहाँ दोस्त की यादें हमारे दिल में ऐसे महफूज़ थी " जैसे कोई बंद संदूकची में कोई कीमती सामान जिसे हम बीच बीच में खोल कर निहार कर प्यार से दुलार कर वापस अपनी जगह रख देते है।
आज फिर से संदूकची से दोस्त की यादे निकल आई ।
जब हम कक्षा एक के विद्यार्थी थे।
""स्कूल के बाहर एक सरकारी नल था , नल के पास ही हमारा दोस्त खड़ा था।
स्कूल में घुसते ही हमने दूर से ही हाथ हिलाकर थोड़ी देर में आने का वादा कर अपनी कक्षा में सबसे आगे बिछी टाट पट्टी पर बैठ गए। 
कुछ ही देर में मुखिया बहन जी ने कक्षा में प्रवेश किया 

"उनके आते ही कड़क मुखमुद्रा देख कर सब की बोलती बंद हो जाती है , "जब वोअपना रोज का रटा रटाया वाक्य दोहराती गिनती पहाड़ा लिखे बगेर कोई पानी पीने नहीं जायेगा ?

हाँ  ! तो बच्चों गिनती , पहाड़ा लिखो कह कर मुखिया बहजी कुर्सी पर सिर टिका आँख बंद कर लेती । 
 बैठने वाले बच्चे उमा और आशा से आग्रह करते तुम लोग धीरे-धीरे लिखना हमें याद नही है ।

लेकिन हमें तो दोस्त से मिलने की जल्दी थी, सो झटपट गिनती पहाड़ा लिख कर कापी टेबल पर रख दी।

"बहन जी ! हम पानी पीने जाए ,  बहनजी ने  एक आँख खोली और कहा  अभी तो आते समय पानी पी के आई थी फिर से प्यास लग गई , तब तक आशा भी आ गई  क्या हुआ देख के तुम्हें भी प्यास लग गई ?

" जी नही !  जी बहन जी "
"काम पूरा  किया? जी बहनजी मैं भी जाऊ जाओ दोनों।
कह कर बहनजी ने आंख बंद कर ली  पीछे बैठे बच्चे एक-दूसरे से खुसर-पुसर कर के पहाड़ लिखने लगे ।आशा और उमा हंसी रोककर बाहर आकर हँसते  हुए नल की तरफ दौड़ पड़ी ।

पानी  पीना  तो बहाना था , नल के पास खड़े दोस्त मिलना जो था,  जाकर झट से लिपट गई  दोस्त इमली से   इमली ने भी एक  कटारा गिरा दिया ।
ओह !  दोस्त एक से क्या होगा सब को देना है ? 

जोर से हवा चली और ढेर सारी इमली गिर गई ।उमा ने दोस्त को गले लगा कर कान में कहा धन्यवाद दोस्त  मुझे इसी तरह रोज इमली देना मैं सब लड़कियों को बाँट दूगी।

"उमा जल्दी करो वर्ना बहनजी नाराज हो जयेगी, अच्छा दोस्त चलते है ।
आशा और उमा जब कक्षा में पहुँची देखा  बहनजी की आँखे बंद है दबे पाँव घुस कर जल्दी जल्दी  
 सभी लड़कियों को बाँट दी और वापस कक्षा के दरवाजे पर आकर बहनजी हम अंदर आए।

बहनजीने  आँख खोली और दहाड़ी इतनी देर लगती है क्या पानी पीने  में  चलो जगह पर बैठो ।
तुम दोनों की देर से आने की यही सजा है , तुम दोनों  ऊँचे स्वर में पहाड़ा बोलो उमा और आशा जोर जोर से दो एकम दो , दो  दूनी चार पीछे से सारी लड़कियां स्वर मिलाने लगी तभी छुट्टी की घंटी बज गई ।
 उमा और आशा घर जाने के लिए निकली दोस्त इमली  ने उन्हें अपनी डाल हिलकर विदा दी दोनों भी पीछे मुड़ मुड़कर  प्रेम भरी निगाहों से देखती हुई हाथ हिलाती हुई घर की तरफ चल दी।

अर्विना गहलोत


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परिचय 

अर्विना गहलोत.... इलाहाबाद उत्तर प्रदेश की निवासी हैं। एम एस सी वनस्पति विज्ञान  जीवाजी यूनिवर्सिटी , ग्वालियर से किया है और वैद्य विशारद इलाहाबाद से किया है। स्वतन्त्र लेखन कर साहित्य की सेवा कर रही हैं। लगभग एक दर्जन से ज्यादा लघु कथा, कहानी और काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।  विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों से और यू ट्यूब पर भी आपकी रचनाओं का प्रसारण होता रहा है। आपको साहित्य के अनेक मंच से सम्मानित भी किया गया है। आपका एम पी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
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