लेखिका 


जब मै ना रहूं 

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जब लिखना तुम कहानी अपनी ।
मेरी जिंदगी का सफर को भी लिखना ।।

अपनी जब भी बेताबी को लिखना ।
मेरे चेहरे की मायूसी को मत भूलना ।।

अपनी राहों के कांटे जब भी गिन्ना ।
मेरे पांव के छालों को भी लिखना ।।

जब तुम अपनी अच्छाई को लिखना ।
मेरी वफा की सच्चाई को भी लिखना ।।

अपनी जब उदासी लिखना 
मेरी पत्थराई आंखो को मत भूलना ।।

जब तुम अपनी तन्हाई को लिखना ।
हर पल बनी तेरी मै परछाई को भी लिखना ।।

अपनो का जब भी तुम जिक्र को लिखना ।
सभी ने ठुकराया है मुझको ये मत भूलना ।।

जब भी तुम अपने मंजिल को लिखना ।
मेरे बिखरे हुए ख्वाबो को भी लिखना ।।

जब भी तुम अपनी मुश्किलो को लिखना ।
मेरे बूलंद इरादे भी लिखना ।।

जब भी तुम अपनी कहानी लिखना ।
मै हर कदम साथ ही ये भी लिखना ।।


  तबस्सुम परवीन 

 अम्बिकापुर सरगुजा,  छत्तीसगढ़ 

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परिचय

तबस्सुम परवीन, अंबिकापुर (सरगुजा) छत्तीसगढ़ की निवासी हैं। आप एक गृहणी हैं और साहित्य की सेवा आप इबादत की तरह करती हैं। हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में सृजन करती हैं। साहित्य की कई विधाओं में आपकी लेखनी चलती है। आप आशु कवि की तरह भी तात्कालिक रचना तैयार कर लेती हैं। आपका एमपी मीडिया पॉइंट पर स्वागत है।
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