लेखक 

लैला मजनूं 

~~~~~~
"क्या बात है भई ! ...बड़े ठहाके लग रहे हैं आज तो।"

"अरे आइए ... आइए! मिसेज वर्मा, बात ही कुछ ऐसी है। आप सुनोगी तो हंसे बिना नहीं रह पाओगी।"


"अच्छा ! ऐसी बात है तो जरूर सुनेंगे। हम तो पूरे बीस दिन बाद इलाज कराके शहर में आये हैं भई ।"


"मिसेज वर्मा अपने पार्क में लैला मजनूं का जोड़ा आया हुआ है। सट - सट के बैठता है। चिपक-चिपक के चलता है। और एक दूजे से खुसर पुसर में बात करता है।"


"अच्छा ! तो ये बात है ? अरे आजकल के इन जवान लड़के लड़कियों को कोई शर्म हया तो है नहीं। खुले आम जो न करे वो ही कम है।"


"मिसेज वर्मा! इन्होंने तो जवानों को भी पीछे छोड़ दिया है। हाथ में हाथ थामे यूं चलते हैं जैसे सच में शीरी फरहाद के अवतार हो।"


"वो देखिए सामने, बैंच पे बैठे हुए हैं।"


"ओह! इनकी बात कर रही हो? अरे ! ये तो मिस्टर एंड मिसेज कपूर हैं। इनको तो मैं जानती हूँ। हमारे साहब ने ही तो गुप्ता जी वाला फ्लैट दिलवाया है। इनके बेटे को कम्पनी ने दो साल के लिए विदेश भेज दिया। तो बेटे ने अपना बड़ा फ्लैट खाली करके ये छोटा दिलवा दिया। 

मिस्टर कपूर को दिखाई कम देता है और मिसेज कपूर को सुनाई कम देता है इसकारण दोनों को साथ - साथ रहना जरूरी है। 
यार! वैसे भी जीवन की सांझ में ही तो हमें साथी की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होती है। ये तो ख़ुशक़िस्मत हैं जो एक दूजे के पूरक बने हुए हैं।"

......और मिसेज वर्मा अपनी आंखों में उभर आई बूंदों को चुपके से पोंछ लेती हैं .....!!

©......"अरुण धर्मावत"

Share To:

Post A Comment: