लेखिका
प्यार होता है क्या ये पता कीजिये
बेवफ़ाई नहीं बस वफा कीजिये ।
जिंदगी चार दिन की सभी की यहाँ,
प्यार से साथ मिलकर रहा कीजिये।
जिंदगी मुस्कुराने का ही नाम है,
दर्द हँसकर के सारे सहा कीजिये।
शब्द रचते नही प्यार की इंतहा ,
प्रीत आँखों की भी तो पढ़ा कीजिये।
जब किसी में नजर आये कमियाँ तभी,
सामने आइना रख लिया कीजिये ।
मजहबों में न बाटो यूँ इंसान को,
प्रेम से सब रहे ये दुआ कीजिये।
मोहिनी की तुम्ही जिंदगी
हो सनम ,
आँखों में ख़्वाब बनकर बसा कीजिये।
मोहिनी गुप्ता, गोला गोकर्ण नाथ, लखीमपुर खीरी, उत्तरप्रदेश
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परिचय
मोहिनी निखिल गुप्ता गृहिणी हैं और साहित्य सेवा के लिए समय निकलती हैं। आपका एक काव्य संग्रह "भाव भागीरथी" प्रकाशित हो चुका है। एमपी मीडिया पॉइंट पर भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हो रही हैं।
आभार..... संपादक शैलेश तिवारी


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